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मटर की ‘काशी पूर्वी’ किस्म के लाइसेंस के साथ नवचेतना फार्म प्रोड्यूसर कंपनी और आईआईवीआर के बीच हुआ समझौता

वाराणसी: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (भा.कृ.अनु.प.-आईआईवीआर), वाराणसी द्वारा विकसित मटर की अगेती किस्म ‘काशी पूर्वी’ के व्यावसायिक प्रसार हेतु नवचेतना फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के साथ एक औपचारिक लाइसेंसिंग समझौता संपन्न हुआ। संस्थान की तकनीकी प्रबंधन ईकाई (आइटीएमयू) के द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में यह समझौता निदेशक डॉ. राजेश कुमार की उपस्थिति में संपन्न हुआ, जिसमें दोनों पक्षों ने किस्म के प्रचार-प्रसार और बीज उत्पादन के लिए सहमति जताई।

इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ राजेश कुमार ने नवचेतना संस्थान के अभिनव प्रयासों की सराहना की तथा आशा जताई कि दोनों संस्थान भविष्य में क्षेत्र के किसानों की प्रगति के लिए अनेक प्रभावशाली कदम उठाएंगे । इस अवसर पर संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नीरज सिंह, डॉ. सुदर्शन मौर्या, डॉ इन्दीवर प्रसाद, डॉ ज्योति देवी, डॉ. विद्यासागर तथा डॉ. प्रदीप करमाकर उपस्थित रहे । नवचेतना फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी की तरफ से मुकेश पाण्डेय, मुकेश त्रिपाठी, अपर्णा, रजनीकांत पाण्डेय एवं रितेश प्रसाद उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. इन्दीवर प्रसाद ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ज्योति देवी ने किया। इस कार्यक्रम के आयोजन में चंद्रोदय प्रकाश तिवारी, परितोष सिंह एवं हिमांशु पाण्डेय ने योगदान दिया। काशी पूर्वी : यह किस्म अगेती प्रकृति की है, जिसमें 50% फूल आने में 35-40 दिन तथा पहली तुड़ाई 65-75 दिनों में हो जाती है। इसके पौधों में औसतन 10-13 फलियाँ होती हैं जिनकी लंबाई 8 से 8.5 सेमी तक होती है।

विशेष बात यह है कि इसके अधिकांश डंठलों पर दो फलियाँ लगती हैं और काशी नंदिनी की तुलना में यह किस्म अधिक फलियाँ और जल्दी फसल देने वाली है। इसकी औसत फली उपज 108-117 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, साथ ही इसमें 50-52% छिलका एवं दाने की उपज दर है। अगेती होने के कारण यह मटर की प्रमुख बीमारियों से बच जाती है। इस लाइसेंसिंग समझौते से नवचेतना फार्म प्रोड्यूसर कंपनी के माध्यम से किसानों को गुणवत्ता युक्त बीज उपलब्ध हो सकेगा और उन्हें अधिक लाभ प्राप्त होगा।

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