बलिया। तेजी से बढ़ते डिजिटल दौर में बच्चों को कम उम्र में मोबाइल फोन देना उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। यह बात सागरपाली स्थित हेलो स्मार्ट किड्स स्कूल के प्रबंधक आर.एस. गुप्ता ने कही। उन्होंने बच्चों में मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए इसके प्रमुख नुकसान और बचाव के तरीकों पर प्रकाश डाला।

आर.एस. गुप्ता ने बताया कि कई शोधों में यह सामने आया है कि बच्चों को मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग कई तरह की समस्याओं को जन्म देता है। मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से बच्चों में नींद की समस्या बढ़ रही है, जिससे उनका शारीरिक विकास प्रभावित होता है। इसके अलावा मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी आंखों की कमजोरी और दृष्टि संबंधी समस्याएं पैदा कर सकती है।
उन्होंने बताया कि मोबाइल की लत बच्चों की मेंटल हेल्थ पर भी बुरा असर डालती है। इससे बच्चों में डिप्रेशन, एंग्जायटी और गंभीर मामलों में आत्महत्या जैसे नकारात्मक विचार तक पनप सकते हैं। वहीं, जरूरत से ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल बच्चों की एकाग्रता को कम करता है, जिससे पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता प्रभावित होती है।
आर.एस. गुप्ता ने यह भी कहा कि मोबाइल की लत से बच्चों के सामाजिक कौशल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे बच्चे दूसरों से बातचीत करने में असहज महसूस करते हैं और धीरे-धीरे सामाजिक गतिविधियों से दूर होने लगते हैं।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर नजर रखें और समय-सीमा तय करें। साथ ही बच्चों को खेलकूद, पढ़ाई, रचनात्मक गतिविधियों और परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रेरित करें, ताकि उनका मानसिक और शारीरिक विकास बेहतर हो सके।
प्रबंधक ने कहा कि यदि किसी बच्चे में मोबाइल की लत के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत नियंत्रित करना जरूरी है, क्योंकि आगे चलकर इसका असर बच्चों के भविष्य पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। बच्चों के साथ अधिक समय बिताना और उन्हें सही दिशा देना ही इसका सबसे प्रभावी समाधान है।








