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दलित नारियों की शिक्षा में सावित्रीबाई फुले के विचार आज भी प्रेरणास्रोत : एम.एल. भारती

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बलिया। दलित नारियों का वर्तमान परिवेश में शिक्षा के प्रति बढ़ता रुझान भारत में शिक्षा आंदोलन की प्रमुख नायिका समाजसेवी सावित्रीबाई फुले के विचारों और उनके संघर्षों का परिणाम है। आज दबे-कुचले नारी समाज में शिक्षा के प्रति जो जागरूकता दिखाई दे रही है, वह सावित्रीबाई फुले के शिक्षा आंदोलन की ही देन है।

उनके आदर्शों और विचारों को अपनाना, विशेषकर युवा पीढ़ी द्वारा, उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। ये विचार समाजवादी पार्टी की बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एम.एल. भारती ने बतौर मुख्य अतिथि विकास खंड अखैनी की ग्राम सभा में आयोजित कंबल वितरण एवं सम्मान समारोह में व्यक्त किए।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय विधायक जियाउद्दीन रिजवी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले के विचार आज के समय में भी शत-प्रतिशत प्रासंगिक हैं। समाज के किसी भी वर्ग का विकास तभी संभव है, जब उस समाज के लोग अधिक से अधिक शिक्षित होंगे।

समारोह में माली विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर माली ने कहा कि समाजोत्थान के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। समाज का विकास तभी संभव है, जब युवा वर्ग उनके विचारों को अपनाए।

जयंती समारोह के मुख्य वक्ता प्रखर समाजवादी नेता राजन कन्नौजिया ने सावित्रीबाई फुले के त्याग, संघर्ष और उन्हें झेलनी पड़ी प्रताड़नाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस दौरान उपस्थित लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम के दौरान लगभग 500 जरूरतमंद लोगों को कंबल वितरित किए गए। जयंती समारोह की अध्यक्षता नंद किशोर गुप्ता ने की, जबकि संचालन आत्मा प्रसाद वर्मा ने किया। कार्यक्रम में कृपा शंकर माली, आदित्य गौतम, देवनारायण यादव, संजय यादव, हरिशंकर वर्मा, संजय वर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में समारोह के संयोजक हृदयनंद वर्मा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

रिपोर्ट- संजय सिंह

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