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वाराणसी में मंदिरों की एकता का समागम; रुद्राक्ष में जली ज्वाला मां की ज्योति, गूंजा हर-हर महादेव

वाराणसी: देश के इतिहास में पहली बार एक छत के नीचे 51 शक्तिपीठ और द्वादश ज्योतिर्लिंग के अर्चक व पुजारी एकत्र हुए। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से ज्वाला देवी की ज्योति को रुद्राक्ष के मंच पर प्रतिष्ठित किया गया। इसके साथ ही द्वादश ज्योतिर्लिंग और 51 शक्तिपीठ की मिट्टी से निर्मित शिवलिंग और मां सती की प्रतिमा की स्थापना के साथ महासमागम आरंभ हो गया।

काशी मानस मंदाकिनी खुज्वान सराय नंदन साध्वी चंद्रा मिश्रा ने कहा कि काशी में शिव और शक्ति दोनों हैं, लेकिन उनके बीच सामंजस्य का अभाव है। यह आयोजन सनातन धर्म को एकसूत्र में पिरोने का प्रयास है। साथ ही कहा कि सनातन को जोड़ने के लिए निकाली जा रही यह पदयात्रा बहुत बड़ी पदयात्रा है. इस दौरान साध्वी चंद्रा मिश्रा ने शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी का शॉल व फूल माला पहनाकर स्वागत किया।

स्टार प्रचारक मुकेश शास्त्री ने कहा इस आयोजन का उद्देश्य यही है कि इस दिशा में कोई समाधान का मार्ग निकाला जाए। 51 शक्तिपीठों को एक दूसरे से जोड़ा जाए।
इसके बाद बीएचयू के छात्रों ने मां सती के जन्म और शक्तिपीठों की उत्पत्ति नृत्य नाटिका का मंचन किया। डॉ. सोमा घोषा ने बनारस के कवि संजय मिश्र की लिखी रचना सुनो-सुनो शक्तिपीठ की कहानी, भक्ति में डूबी भक्त की कहानी… सुनाई। गीतों के बोल पर कलाकारों ने शिव-शक्ति के नृत्य का मंचन किया।

इसके पहले विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, मध्य प्रदेश के पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, प्रखर महाराज, महाराष्ट्र के जितेंद्र नाथ महाराज, कोलकाता काली पीठ के रमाकांत महाराज, देवघर के प्रकाशानंद महाराज, कामेश्वर नाथ उपाध्याय, आयोजक डॉ. रमन त्रिपाठी ने दीप जलाकर समागम का शुभारंभ किया।

रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में सेंटर फॉर सनातन रिसर्च एवं ट्राइडेंट सेवा समिति ट्रस्ट की ओर से दो दिवसीय द्वादश ज्योतिर्लिंग और 51 शक्तिपीठ महासमागम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम की शुरुआत लोकगायक अमलेश शुक्ला के भजनों से हुई। इसके बाद डॉ. सोमा घोष ने शिवतांडव की प्रस्तुति दी।

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