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यातायात माह: सुबह-ए-बनारस ने जागरूकता के तहत निशुल्क हेलमेट वितरित किये

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वाराणसी: यातायात माह के अवसर पर सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए सुबह-ए-बनारस क्लब ने एक सराहनीय पहल की। बुधवार को मैदागिन चौराहे पर बिना हेलमेट बाइक चला रहे लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया गया।

इस अभियान का नेतृत्व संस्था के अध्यक्ष मुकेश जायसवाल, उपाध्यक्ष अनिल केसरी और कोषाध्यक्ष नंदकुमार टोपी वाले ने किया। मछोदरी स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर के महंत स्वामी प्रेम स्वरूप दास के आवाहन पर, पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर दर्जनों बाइक सवारों को रोका और उनके माथे पर तिलक लगाकर निशुल्क हेलमेट पहनाया।

कार्यक्रम के दौरान प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार सिंह ने कहा कि हेलमेट केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि जीवन सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में सिर पर चोट लगने से अधिकांश मौतें होती हैं, और हेलमेट इन स्थितियों में जीवन रक्षक साबित होता है।

संस्था के अध्यक्ष मुकेश जायसवाल ने कहा, “हर बाइक सवार को यह याद रखना चाहिए कि घर पर उनका परिवार उनकी सकुशल वापसी की प्रतीक्षा करता है। हेलमेट पहनकर न केवल अपनी जान बचाएं, बल्कि यातायात नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित यात्रा करें।”

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोगों में गणेश सिंह, श्याम दास गुजराती, ललित गुजराती, और बी. डी. टकसाली शामिल थे। अभियान के दौरान “जान है तो जहान है” का संदेश देते हुए, लोगों से यातायात नियमों का पालन करने की अपील की गई।

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संपत्ति विवाद में हत्या, एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास गाजीपुर जनपद न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने दिलदारनगर थाना क्षेत्र के चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने संपत्ति विवाद में युवक की हत्या के मामले में एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।अदालत ने ऐनुद्दीन खाँ, नौशाद खाँ, इरफान खाँ और माहेनूर निशा उर्फ मेहरून निशा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराया।यह घटना 8 अप्रैल 2023 की रात की है, जब दिलदारनगर निवासी अमजद खाँ की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक की पत्नी शहनाज अख्तर ने आरोप लगाया था कि सास की मृत्यु के बाद संपत्ति विवाद को लेकर परिवार लगातार प्रताड़ित कर रहा था और धमकियाँ दे रहा था।अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की 60 प्रतिशत राशि मृतक की पत्नी को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। न्यायाधीश ने कहा कि पारिवारिक हत्याएं समाज को शर्मसार करती हैं और ऐसे अपराधों पर कठोर दृष्टिकोण जरूरी है।

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