वाराणसी: जिला कारागार वाराणसी में भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं के आरोपों को लेकर अधिवक्ताओं ने शनिवार को जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपा। इस मामले में अधिवक्ताओं का नेतृत्व अधिवक्ता शैलेन्द्र पाण्डेय ने किया, जो मोदी परिवार के सदस्य हैं। अधिवक्ताओं ने जेल अधीक्षक डॉ. उमेश सिंह पर गंभीर आरोप लगाए, जिनमें अवैध वसूली, नियमों का उल्लंघन और कैदियों के साथ दुर्व्यवहार शामिल है।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि जेल अधीक्षक ने अपने निजी नियम बना लिए हैं, जिसके तहत कैदियों से पैसे वसूले जाते हैं। विचाराधीन बंदियों और दोषसिद्ध कैदियों से श्रम कार्य न करवाने के लिए उनसे 1600 रुपये से 2200 रुपये तक वसूले जाते हैं। इसके अलावा, कैदियों को परेशान करने के लिए मनमाने कार्यों में लगाया जाता है।
शिकायत के अनुसार, जेल में गांजा बेचने का ठेका एक कैदी को दिया गया है, जो इसके बदले अधीक्षक को हर महीने 2.5 लाख रुपये अदा करता है। इसी प्रकार, कैंटीन संचालन का ठेका भी एक दोषसिद्ध बंदी को दिया गया है, जिससे अधीक्षक को प्रतिदिन 80,000 रुपये मिलते हैं। कैंटीन से पान, गुटखा, और अन्य सामग्री महंगे दामों पर बंदियों को बेची जाती हैं।
मुलाकात और पीसीओ में रिश्वतखोरी
शिकायत में यह भी बताया गया कि बंदियों और उनके परिजनों की मुलाकात के लिए 250 रुपये अतिरिक्त वसूले जाते हैं। पीसीओ सुविधा के नाम पर भी बंदियों से 100 से 2000 रुपये तक लिए जाते हैं, और इसका ठेका एक दोषसिद्ध बंदी को दिया गया है।
स्वास्थ्य सुविधाओं की अनदेखी
स्वास्थ्य सुविधाओं में घोर लापरवाही का आरोप लगाया गया है। शिकायत में कहा गया कि बीमार बंदियों को अस्पताल भेजने के लिए रिश्वत मांगी जाती है। कई बार इलाज में देरी के कारण बंदियों की मौत हो चुकी है, जिसे हार्ट अटैक का बहाना बनाकर दिखाया जाता है।
सीसीटीवी किया जा रहा नजरअंदाज
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि पूर्व डिप्टी जेलर रत्न प्रिया ने छेड़खानी के आरोप लगाए थे, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जेल में लगे सीसीटीवी कैमरों के सामने बंदी खुलेआम चिलम और गांजा पीते हैं, लेकिन अधिकारियों ने अब तक इसे नजरअंदाज किया है।







