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वाराणसी: कम्युनिटी बेस्ड ब्लड सैंपलिंग शिविर की शुरुआत, पहले दिन 76 लोगों के रक्त नमूने लिए गए

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वाराणसी: मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप चौधरी के निर्देश पर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अर्दली बाजार की ओर से सोमवार को खजुरी वार्ड, पक्की बाजार स्थित विभा आंगनवाड़ी केंद्र पर कम्युनिटी बेस्ड ब्लड सैंपलिंग शिविर का शुभारंभ किया गया।

शिविर का उद्घाटन प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. संगीता मौर्य ने किया। उन्होंने जानकारी दी कि पहले दिन 76 व्यक्तियों के रक्त के नमूने एकत्र किए गए और सभी का ब्लड प्रेशर परीक्षण भी किया गया। शिविर में ब्लड शुगर, एनीमिया, मलेरिया, डेंगू, टीबी, हाइपरटेंशन सहित अन्य बीमारियों की जांच की जा रही है।

डॉ. मौर्य ने कहा कि यह पहल विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो किसी कारणवश अस्पताल जाकर जांच नहीं करवा पाते। स्वास्थ्य विभाग सभी जांच निशुल्क उपलब्ध करा रहा है, ताकि बीमारियों का समय से पता लगाकर नजदीकी अस्पताल में उपचार प्रारंभ किया जा सके। उन्होंने बताया कि ऐसे शिविर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अर्दली बाजार के सभी वार्डों में आयोजित किए जाएंगे, जिससे अधिक से अधिक लोगों का समय पर निदान सुनिश्चित हो सके।

अर्बन नोडल डॉ. आर.के. सिंह ने बताया कि इस तरह के शिविर जनपद के विभिन्न शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के अंतर्गत आने वाली मलिन बस्तियों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर भी लगाए जाएंगे। इसके प्रभावी संचालन हेतु एएनएम, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से माइक्रोप्लान तैयार किया जा रहा है।

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संपत्ति विवाद में हत्या, एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास गाजीपुर जनपद न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने दिलदारनगर थाना क्षेत्र के चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने संपत्ति विवाद में युवक की हत्या के मामले में एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।अदालत ने ऐनुद्दीन खाँ, नौशाद खाँ, इरफान खाँ और माहेनूर निशा उर्फ मेहरून निशा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराया।यह घटना 8 अप्रैल 2023 की रात की है, जब दिलदारनगर निवासी अमजद खाँ की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक की पत्नी शहनाज अख्तर ने आरोप लगाया था कि सास की मृत्यु के बाद संपत्ति विवाद को लेकर परिवार लगातार प्रताड़ित कर रहा था और धमकियाँ दे रहा था।अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की 60 प्रतिशत राशि मृतक की पत्नी को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। न्यायाधीश ने कहा कि पारिवारिक हत्याएं समाज को शर्मसार करती हैं और ऐसे अपराधों पर कठोर दृष्टिकोण जरूरी है।

संपत्ति विवाद में हत्या, एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास गाजीपुर जनपद न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने दिलदारनगर थाना क्षेत्र के चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने संपत्ति विवाद में युवक की हत्या के मामले में एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।अदालत ने ऐनुद्दीन खाँ, नौशाद खाँ, इरफान खाँ और माहेनूर निशा उर्फ मेहरून निशा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराया।यह घटना 8 अप्रैल 2023 की रात की है, जब दिलदारनगर निवासी अमजद खाँ की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक की पत्नी शहनाज अख्तर ने आरोप लगाया था कि सास की मृत्यु के बाद संपत्ति विवाद को लेकर परिवार लगातार प्रताड़ित कर रहा था और धमकियाँ दे रहा था।अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की 60 प्रतिशत राशि मृतक की पत्नी को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। न्यायाधीश ने कहा कि पारिवारिक हत्याएं समाज को शर्मसार करती हैं और ऐसे अपराधों पर कठोर दृष्टिकोण जरूरी है।

संपत्ति विवाद में हत्या, एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास गाजीपुर जनपद न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने दिलदारनगर थाना क्षेत्र के चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने संपत्ति विवाद में युवक की हत्या के मामले में एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।अदालत ने ऐनुद्दीन खाँ, नौशाद खाँ, इरफान खाँ और माहेनूर निशा उर्फ मेहरून निशा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराया।यह घटना 8 अप्रैल 2023 की रात की है, जब दिलदारनगर निवासी अमजद खाँ की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक की पत्नी शहनाज अख्तर ने आरोप लगाया था कि सास की मृत्यु के बाद संपत्ति विवाद को लेकर परिवार लगातार प्रताड़ित कर रहा था और धमकियाँ दे रहा था।अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की 60 प्रतिशत राशि मृतक की पत्नी को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। न्यायाधीश ने कहा कि पारिवारिक हत्याएं समाज को शर्मसार करती हैं और ऐसे अपराधों पर कठोर दृष्टिकोण जरूरी है।

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