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वाराणसी: मौनी अमावस्या पर काशी में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई पुण्य की डुबकी

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वाराणसी। मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर काशी में आस्था का अद्भुत और दिव्य नजारा देखने को मिला। भोर होते ही काशी के 84 घाट श्रद्धालुओं से पट गए। देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया और सुख, शांति व मोक्ष की कामना की। घाटों पर “हर-हर गंगे” और “जय मां गंगा” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा जल अमृतमय हो जाता है और इसमें स्नान करने से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन मानव सभ्यता के आदि पुरुष ऋषि मनु का जन्म हुआ था। इस दिन भगवान विष्णु एवं मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के उपरांत विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

धार्मिक दृष्टि से मौनी अमावस्या पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालुओं ने ब्राह्मणों को गेहूं, गुड़, लाल वस्त्र, लाल पुष्प, लाल चंदन, शहद, केसर, घी एवं कुमकुम आदि का दान कर पुण्य अर्जित किया। घाट पुरोहित राजू तिवारी ने बताया कि मौनी अमावस्या माघ मास की अमावस्या होती है, जिसमें पितरों की पूजा और परिवार के कल्याण का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि यदि दंपति इस दिन मौन रहकर गंगा स्नान करते हैं, तो घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मौनी अमावस्या के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए घाटों पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। अनाउंसमेंट के माध्यम से श्रद्धालुओं से बैरिकेडिंग के भीतर ही स्नान करने की अपील की गई। जल पुलिस, एनडीआरएफ, पुलिस बल के साथ-साथ सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए लगातार निगरानी की गई, जिससे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या दुर्घटना से बचा जा सके।

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