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भारत बंद: वाराणसी में महिलाओं ने सरकार की नीतियों के खिलाफ किया प्रदर्शन, श्रम कोड, बिजली निजीकरण और स्कूल मर्जर पर जताया विरोध…..

वाराणसी: सरकार की नीतियों के खिलाफ 9 जुलाई बुधवार को देशभर में आयोजित भारत बंद के दौरान वाराणसी में अखिल भारतीय आम हड़ताल में महिलाओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह बंद केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, स्वतंत्र संघों, संयुक्त किसान मोर्चा और मजदूर संगठनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर बुलाया गया था। इस व्यापक हड़ताल के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हमारी प्रमुख मांगों में…

मांग पत्र में प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  1. श्रम संहिताओं की वापसी:
    जनसंगठनों का कहना है कि संसद द्वारा पारित चारों श्रम संहिताएं (लेबर कोड) मजदूरों के लंबे संघर्षों से अर्जित अधिकारों पर सीधा हमला हैं। ये कोड मजदूर विरोधी हैं और पूरी तरह कॉरपोरेट और पूंजीपतियों के हित में बनाए गए हैं। संगठनों ने मांग की कि ये चारों संहिताएं संपूर्णता में वापस ली जाएं और पुराने श्रम कानूनों को बहाल किया जाए। ‘8 घंटे काम का अधिकार’ दोबारा लागू किया जाए।
  2. कृषि कानूनों की वापसी और MSP की गारंटी:
    वर्ष 2020-21 में जिस किसान आंदोलन के दबाव में केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों को वापस लिया था, उन्हीं कानूनों को अब “राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति” के नाम पर दोबारा लागू किया जा रहा है। जनसंगठनों ने इसे किसानों के साथ विश्वासघात बताया और कहा कि यह प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए तथा एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए।
  3. बिजली निजीकरण पर रोक:
    उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का जनसंगठनों ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि निजीकरण से बिजली महंगी होगी, कर्मचारियों की सेवा और आरक्षण पर असर पड़ेगा, जबकि इसका लाभ सिर्फ निजी कंपनियों को होगा। मांग की गई कि बिजली का निजीकरण रोका जाए, गरीबों को हर महीने 200 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाए, फर्जी बिलों पर रोक लगे और स्मार्ट मीटर योजना रद्द की जाए।
  4. स्कूल मर्जर के फैसले को बताया शिक्षा-विरोधी:
    यूपी सरकार द्वारा कक्षा 1 से 8 तक के 27,000 सरकारी प्राइमरी और जूनियर स्कूलों को कम छात्र संख्या के आधार पर बंद करने के फैसले को जनसंगठनों ने गरीब और शिक्षा विरोधी करार दिया। संगठनों का कहना है कि इससे गरीब बच्चे शिक्षा से वंचित होंगे, क्योंकि वे दूर के स्कूल नहीं जा पाएंगे। मर्जर से रसोइयों, शिक्षकों और अन्य स्टाफ की नौकरी पर भी संकट आएगा। मांग की गई कि मर्जर का फैसला तुरंत वापस लिया जाए और स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारकर छात्र संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जाए।

इसके साथ ही प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने कहा कि सभी फसलों पर लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी शामिल हो, कर्ज माफी और सभी के लिए रोजगार की गारंटी हो, मनरेगा के तहत 600 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी और 200 दिन का काम, इसके साथ ही 26000 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन, और 9000 रुपये मासिक पेंशन, कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना की बहाली, स्वास्थ्य, शिक्षा और भोजन सभी के लिए मुफ्त और निजीकरण पर रोक, अति अमीरों पर विशेष कर लगाने की मांग की…

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