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रामनगर की रामलीला: नेमी भक्तों की शाही परंपरा, हाथों में डंड, तन पर पारंपरिक वस्त्र, तस्वीरें देख हो जायेंगे मंत्रमुग्ध

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वाराणसी: रामनगर की रामलीला और इसके नेमी ऐसे ही प्रसिद्ध नहीं है। जैसे यहां की रामलीला विश्व प्रसिद्ध है वैसे ही यहां पर आने वाले नेमी भी काफी संयमित और नियमित होते हैं. स्नान करने के बाद यह लोग सफेद धोती कुर्ता तो कोई धोती कुर्ता पर पगड़ी लगाए नजर आता है। इसके अलावा आंखों में सुरमा और हर दिन अलग अलग तरह के इत्र का प्रयोग कर यह नेमी लीला प्रेमी इस लीला में शामिल होने के लिए पहुंचते हैं।

प्रतिदिन रामनगर की लीला देखने वाले नेमी भक्त बंसत यादव ने बताया कि वो 35 सालों तक इस लीला को देखने यहां आ रहे है। अपने दुकान और कामकाज को छोड़ बसंत यादव पूरे एक महीने तक इस लीला में शामिल होते है और इस अद्भुत पल के साक्षी बनते है। उन्होंने बताया कि हर हम लोग दुर्गा कुंड पोखरे पर पहुंचते हैं और सभी लोग साथ में स्नान करते हैं।स्नान करने के बाद हम लोग साफ और शुद्ध कपड़े को पहनकर ही लीला को देखते है।

लीला प्रेमी विजय कश्यप ने बताया कि वो अपने दोस्तों के साथ इस लीला को हर दिन निहारते हैं। इस लीला में स्वयं प्रभु श्री राम का साक्षात दर्शन होता है और हम सब लोग उनके ही भक्ति में लीन रहते है। करीब 40 साल से उनके लीला में शामिल होने का क्रम चलता आ रहा है। उन्होंने बताया कि लीला के इन 1 महीनों में वो जितना भी जरूरी हो लेकिन बनारस से कभी भी वो दूर नहीं जाते है।

बसंत यादव और विजय कश्यप ने बताया कि हम लोगों के हाथ में एक डंडा होता है। यह डंडा हमारे भाई के रूप में होता है। जहां भी हम लोगों को सहारे की जरूरत होती है यह भाई के रूप में हम लोगों का सहारा बनता है। जितने भी दिन आते हैं यह डंडा हम लोगों के साथ होता है। यह डंडा हम लोगों का सहारा बनता है।

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