उत्तराखंड भूमि को मिलेगा यूनिक आईडी आपके उत्तराखंड सरकार ने एक नई योजना के तहत राज्य में हर एक भूमि को यूनिक आईडी देने की प्रक्रिया को शुरू किया है योजना का प्रथम उद्देश्य भूमि से जुड़े कहा सुनी को खत्म करना है और भूमि के मालिक से जुड़ी जानकारी को डिजिटल रूप से सुरक्षित और खुलापन बनाना है जो कि हर प्लॉट को एक यूनिक नंबर दिया जाएगा जिस की भूमि का पूरा व्याख्या आसानी से ऑनलाइन मिल सकेगा इस पहल से जमीन को खरीदना और बेचना मालिक और नापतोल जैसे मुद्दों में खुलापन आएगा और धोखाधड़ी की भी संभावना कम हो जाएगी।
उत्तराखंड भूमि यूनिक आईडी से जुड़े कुछ मुख्य बिंदु
- सारे भूमि को एक खास आईडी मिलेगा जिससे कि उसकी पहचान में आसानी होगा।
- भूमि का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध होगा जिससे की जानकारी आसानी से मिल जाएगा।
- इस प्रक्रिया से भूमि से जुड़े धोखाधड़ी और कहासुनी को भी रोकने में मदद मिलेगा।
- भूमि का व्याख्या ऑनलाइन पोर्टल पर देख सकते हैं जिससे की जानकारी प्राप्त करना सरल होगा।
- इस बार से आपके भूमि को खरीदने और बेचने लोन लेने और अन्य कानूनी प्रक्रिया में सहूलियत होगी।
आपके उत्तराखंड राज्य में भूमि प्रबंधन की प्रक्रिया को आसान और खुलापन बनाने के लिए एक बहुत बड़ा पहला किया जा रहा है जिससे कि राज्य सरकार अब प्रत्येक भूमि के लिए एक विशिष्ट यूनिक आईडी को जारी करने की योजना पर काम कर रही है इस नई व्यवस्था से भूमि से जुड़े सभी जानकारी एक ही क्लिक पर मिल जाएगा जिससे की भूमि की पूरी कुंडली मालिकाना हक और भौगोलिक व्याख्या भी शामिल होगा राजस्व विभाग ने इस योजना के तहत अब तक 3000 गांव में काम को पूरा कर दिया है और इस साल के अंत तक पूरे राज्य में या प्रक्रिया को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
भूमि की पारंपरिक जानकारी: खसरा और खतौनी
अब तक आपको भूमि के जानकारी को हासिल करने के लिए खसरा और खतौनी जैसे फाइल पर निर्भर रहना पड़ता था यह फाइल भूमि के मालिक और उसके क्षेत्रफल के बारे में जानकारी देता है लेकिन इस प्रणाली में कई बार गलतफहमी या फिर कहा सुनने की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी क्योंकि आपकी भूमि का सत्य स्थान सीमांकन या फिर सही मलिकाना हक की जानकारी पूरे तरह से स्पष्ट नहीं होती थी इस वजह से कई बार भूमि पर कहासुनी या फिर धोखाधड़ी के मामले भी सामने आते थे।
यूनिक आईडी: एक नया कदम
आपके राष्ट्र विभाग अब हर एक भूमि को एक खास यूनिक आईडी देने की तैयारी में है इस ईद के जरिए से प्रत्येक भूमि के बारे में खास जानकारी प्राप्त की जा सकती है या योजना केंद्र सरकार के गांव के विकास मंत्रालय के सहयोग से चलाया जा रहा है जिसमें कि राज्य के सारे भूमि करो को डिजिटल प्रणाली में समाहित कर दिया जाएगा प्रत्येक भूमि को एक खास संख्या दिया जाएगा जिससे कि उसे भूमि का सही स्थान देशांतर और अक्षांश निर्देशांक जैसे कि गूगल को ऑर्डिनेट के जरिए से आसानी से पता लगाया जा सकता है।
इस यूनिक आईडी के जरिए से भूमि के मालिक का नाम क्षेत्रफल भूमि का स्थान और अन्य जरूरी जानकारियां डिजिटल के रूप में उपलब्ध होगी इससे क्या है की भूमि के अंश निर्धारण और सीमांकन में भी आसानी होगी जिससे की रात सब विभाग के सचिव ने बताया है कि इस नई व्यवस्था के तहत भूमि की एक खास पहचान संख्या देने की योजना पर बहुत तेजी से कम हो रहा है।
कैसे काम करेगी यूनिक आईडी?
यूनिक आईडी को बनाने की प्रक्रिया समझना बहुत आसान है रसो विभाग एक खास सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहा है जो के डिजिटल मैपिंग और कोऑर्डिनेट्स के जरिए से भूमि भूमि की पहचान करता है सबसे पहले 8 डिजिटल नक्शा में प्रत्येक भूमि के लिए एक विशिष्ट नंबर जारी किया जाता है इसके बाद उसे भूमि के देशांतर और अक्षांश निर्देशांक को मैप में डाला जाता है जिससे की भूमि का सही स्थान पता चल सके इन सभी जानकारी को एक साथ जोड़कर खास भूमि पार्सल पहचान संख्या को तैयार किया जाता है।
अब तक की प्रगति
आपके उत्तराखंड राज्य में कुल 16000 से ज्यादा गांव है राज्य विभाग ने इनमें से 3000 से ज्यादा गांव में भूमि के यूनिक आईडी को तैयार कर लिया है हालांकि आईडी अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है विभाग का कहना है कि जब तक सारे गांव में या प्रक्रिया पूरा नहीं हो जाता है तब तक इस सार्वजनिक नहीं किया जाएगा दिसंबर तक सारे गांव की भूमि का डाटा प्राप्त कर लिया जाएगा और उसके बाद ही इसे सभी लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
यूनिक आईडी के लाभ
इस नई प्रणाली के लागू होने से भूमि के मालिक और सीमांकन से जुड़े कहानी में भी कमी आएगी अक्सर भूमि कहां सनी के वजह से उत्पन्न होता है क्योंकि सही जानकारी उपलब्ध नहीं होता यूनिक आईडी के आने के बाद भूमि की पूरी जानकारी डिजिटल के रूप में उपलब्ध होगा जिससे कि कोई भी व्यक्ति जाकर ऑनलाइन के माध्यम से भूमि का व्याख्या देख सकता है साथ में भूमि के मालिक में कोई भी बदलाव होने पर इसका रिकॉर्ड तुरंत ही अपडेट हो जाएगा जिससे कि फर्जी वाले की संभावना भी काम हो जाएगी।
यूनिक आईडी के जरिए से भूमि की पहचान का काम पूरे तरह से खुलापन और तकनीकी तरीके से होगा इससे क्या है की भूमि धारक और राज्य विभाग के बीच में संवाद भी आसान हो जाएगा जिससे कि लोगों को अब खसरा और खतौनी जैसे फाइल के लिए सरकारी कार्यालय में बार-बार जाना नहीं पड़ेगा भूमि के पहचान से जुड़े सारी जानकारी एक ही प्लेटफार्म पर उपलब्ध होगी जो कि लोगों के लिए बहुत सुविधाजनक होगा।
भविष्य की योजनाएं
यूनिक आईडी के अलावा भी राजस्व विभाग भूमि के अंश निर्धारण और सीमांकन के लिए भी खास योजना पर काम कर रहे हैं इससे क्या है की भूमि कहासुनी को सुलझाने में और भी ज्यादा सहूलियत होगा जिससे कि विभाग यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि यह नई प्रणाली पूरे तरह से खुलापन और सुरक्षित हो ताकि कोई भी व्यक्ति अपने भूमि की जानकारी को आसानी से प्राप्त कर सके।
राजस्थान विभाग के अधिकारियों का करना यह है कि इस पूरे प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने से समय का भी बचत होगा और साथ ही प्रशासनिक कामों में भी तेजी आएगी इसके अलावा यह प्रणाली सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान का भी एक हिस्सा है जिससे कि पूरे देश भर में भूमि प्रबंधन और रिकॉर्ड को ऑनलाइन लाने का लक्ष्य है।
कैसे बदलेगी यह प्रणाली भूमि प्रबंधन?
यह प्रणाली आपके भूमि प्रबंधन में एक क्रांतिकारी बदलाव को लाने जा रहे हैं अब तक भूमि के मालिक और क्षेत्रफल से जुड़े मामले कठिन और समय लेने वाले होते थे लेकिन यूनिक आईडी प्रणाली आने से यह प्रक्रिया आसान और खुलापन होगा इससे न केवल भूमि के मालिक को फायदा होगा बल्कि सरकारी विभाग के काम में भी सुधार होगा जिससे की भूमि की पूरी जानकारी एक ही जगह पर उपलब्ध होने से कहासुनी की भी संभावना कम हो जाएगी।









