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पटना: बुर्का-नकाब पहनकर ज्वेलरी शॉप में एंट्री पर रोक, बिहार में मचा सियासी बवाल

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पटना। कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश के झांसी में सर्राफा व्यवसायियों द्वारा बुर्का या हिजाब पहनकर ज्वेलरी शॉप में आने पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के बाद अब इसका असर बिहार में भी देखने को मिल रहा है। बिहार के कई इलाकों में सर्राफा व्यवसायियों ने सुरक्षा का हवाला देते हुए इसी तरह का निर्णय लागू कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, बिहार में सर्राफा व्यापारियों ने अपनी दुकानों के बाहर नोटिस चस्पा किया है, जिसमें साफ लिखा है कि बुर्का, नकाब, मास्क और हेलमेट पहनकर दुकान में प्रवेश वर्जित है। व्यापारियों का कहना है कि यह फैसला हाल के दिनों में बढ़ी चोरी और लूट की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि ग्राहकों की पहचान स्पष्ट हो सके और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा सके।

हालांकि इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है। कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इस निर्णय को लेकर आपत्ति जताई है और इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, सर्राफा व्यवसायियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी भी समुदाय की भावनाओं को आहत करना नहीं, बल्कि व्यापार और ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

मामले को लेकर राज्य में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कुछ नेताओं ने इसे भेदभावपूर्ण कदम बताया है, जबकि कुछ ने व्यापारियों के सुरक्षा संबंधी तर्कों का समर्थन किया है। फिलहाल यह मुद्दा बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

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संपत्ति विवाद में हत्या, एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास गाजीपुर जनपद न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने दिलदारनगर थाना क्षेत्र के चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने संपत्ति विवाद में युवक की हत्या के मामले में एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।अदालत ने ऐनुद्दीन खाँ, नौशाद खाँ, इरफान खाँ और माहेनूर निशा उर्फ मेहरून निशा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराया।यह घटना 8 अप्रैल 2023 की रात की है, जब दिलदारनगर निवासी अमजद खाँ की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक की पत्नी शहनाज अख्तर ने आरोप लगाया था कि सास की मृत्यु के बाद संपत्ति विवाद को लेकर परिवार लगातार प्रताड़ित कर रहा था और धमकियाँ दे रहा था।अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की 60 प्रतिशत राशि मृतक की पत्नी को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। न्यायाधीश ने कहा कि पारिवारिक हत्याएं समाज को शर्मसार करती हैं और ऐसे अपराधों पर कठोर दृष्टिकोण जरूरी है।

संपत्ति विवाद में हत्या, एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास गाजीपुर जनपद न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने दिलदारनगर थाना क्षेत्र के चर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने संपत्ति विवाद में युवक की हत्या के मामले में एक ही परिवार के चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।अदालत ने ऐनुद्दीन खाँ, नौशाद खाँ, इरफान खाँ और माहेनूर निशा उर्फ मेहरून निशा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराया।यह घटना 8 अप्रैल 2023 की रात की है, जब दिलदारनगर निवासी अमजद खाँ की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक की पत्नी शहनाज अख्तर ने आरोप लगाया था कि सास की मृत्यु के बाद संपत्ति विवाद को लेकर परिवार लगातार प्रताड़ित कर रहा था और धमकियाँ दे रहा था।अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की 60 प्रतिशत राशि मृतक की पत्नी को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। न्यायाधीश ने कहा कि पारिवारिक हत्याएं समाज को शर्मसार करती हैं और ऐसे अपराधों पर कठोर दृष्टिकोण जरूरी है।