गाजीपुर। शक्करपुर गांव में प्रस्तावित रेलवे अंडरपास निर्माण का मामला प्रशासनिक सुस्ती का शिकार बन गया है। दो बार सर्वे और जांच रिपोर्ट पूरी तरह अनुकूल आने के बावजूद अब तक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी नहीं किया गया है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

रेलवे अंडरपास की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. जितेंद्र प्रसाद लंबे समय से संघर्षरत हैं। उन्होंने इस संबंध में SDM मुहम्मदाबाद, जिलाधिकारी गाजीपुर, मुख्यमंत्री सचिवालय लखनऊ और नोडल कार्यालय दिल्ली को क्रमवार आवेदन भेजे हैं। हाल ही में जिलाधिकारी गाजीपुर को दिया गया आवेदन औपचारिक रूप से निस्तारित किया गया, जिसमें कहा गया कि NOC के लिए अलग प्रक्रिया चल रही है।

हालांकि, प्रशासन ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि प्रक्रिया किस विभाग स्तर पर अटकी हुई है और इसे पूरा करने की समय-सीमा क्या है। इसी अनिश्चितता के कारण ग्रामीणों में नाराज़गी बढ़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे अंडरपास के अभाव में बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को रोज़ाना रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है, जिससे जीवन के लिए खतरा बना रहता है। गांव में पहले घटित एक गंभीर दुर्घटना ने इस मांग को और भी संवेदनशील बना दिया है।
डॉ. जितेंद्र प्रसाद ने कहा कि यह आंदोलन व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और जनहित के लिए है। उन्हें पूरे ग्राम समाज, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि जब तक अंडरपास की NOC जारी नहीं होगी, वे प्रशासनिक स्तर पर प्रयास जारी रखेंगे।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर शीघ्र NOC जारी की जाए और रेलवे अंडरपास निर्माण कार्य शुरू कराया जाए। उनका कहना है कि यह परियोजना कोई सुविधा नहीं, बल्कि जीवन रक्षक आवश्यकता है, जिसकी उपेक्षा अब और बर्दाश्त नहीं की जा सकती।









