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Karwa Chauth 2024: छलनी से चांद देखने की परंपरा का गहरा रहस्य

छलनी से चांद देखने की परंपरा का गहरा रहस्य

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Karva chauth 2024 करवा चौथ का जो पर्व है वह हमारे भारत में सुहागन महिलाओं के लिए एक बहुत ही जरूरी त्यौहार होता है इस दिन सभी महिलाएं अपने पति के लिए लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत को रखती हैं व्रत की जो शाम होती है महिलाएं चांद को चलने से देखकर ही अपना व्रत खोलते हैं या जो परंपरा है केवल एक रस्म ही नहीं होता है बल्कि इसके पीछे एक बहुत ही बड़ा और गहरा रहस्य है जो की धार्मिक और सांस्कृतिक रहस्य से छुपे हुए हैं। चलने से चंद्रमा को देखने की प्रथा का एक खास ही महत्व है जो इस पर्व को और भी ज्यादा खास बना देता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रमा को सीधा-सीधा देखने से कुछ अशुभ प्रभाव भी हो सकता है इसीलिए जो भी महिलाएं छलनी का इस्तेमाल करती हैं इसके जारी से वह चंद्रमा की रोशनी को अपने पति के लिए बहुत ही शुभ मानते हैं साथी जो छलनी पर दिया का लव रखा होता है उसे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है जो कि आपके परिवार में सुख और समृद्धि को लाने में बहुत ही मदद करता है इस तरह से करवा चौथ का यह जो पर्व है न केवल दांपत्य जीवन के बंधन को मजबूत करता है बल्कि जो भी महिला इस व्रत को करते हैं उनके लिए यह बहुत ही खास दिन होता है जब भी वह अपने प्रेम और समर्पण को सामने प्रकट करती है।

छलनी से चांद देखने की परंपरा का महत्व

करवा चौथ की जो रात होती है उसे दिन सभी महिलाएं चंद्रमा के आने की प्रतीक्षा करती है और इसके पीछे धार्मिक मान्यता भी जुड़ा हुआ है धार्मिक ग्रंथो के अनुसार चंद्रमा को सीधे देखने से नकारात्मकता का प्रभाव पड़ता है इसलिए जब भी छलनी के जरिए से चांद को देखते हैं ताकि नकारात्मकता से बचा जा सके और आपके परिवार में सुख समृद्धि हमेशा बनी रहे।

 गणेश जी का चंद्रदेव को श्राप और उसका असर

धार्मिक मान्यता के अनुसार एक बार भगवान गणेश जी ने चंद्र देव को घमंड की वजह से श्राप दे दिया था कि उनका जो सीधा दर्शन करेगा वह व्यक्ति कलंक लगने लगेगा इस तरह के चलते से चंद्रमा का सीधा दर्शन हमेशा अशुभ माना गया है इसीलिए करवा चौथ पर जो भी महिलाएं हैं उनको सलाह दिया जाता है कि वह जब भी चलने का इस्तेमाल करें ताकि चंद्रमा के कलंकित प्रभाव से बचा जा सके चलने का जो इस्तेमाल है वह सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं होता है बल्कि यह प्रतीकात्मक रूप से नकारात्मकता को भी दूर करने और सकारात्मक का स्वागत करने के लिए भी किया जाता है।

दीपक और छलनी का सांकेतिक महत्व

करवा चौथ के दिन जितने भी महिलाएं होती है वह छलनी में दीपक को रख करके चंद्रमा के दर्शन को करने की एक खास परंपरा है जो की धार्मिक रूप से इस जीवन में प्रकाश समृद्धि और सुख शांति का प्रतीक मंत्र है दीपक की जो लो होती है यह संकेत देती है कि जीवन में अंधकार को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है इसके अलावा दीपक जलाने से पूजा में जो भूल हुई होती है किसी से भी या फिर दोष से मुक्ति मिलता है और तो और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है यह माना जाता है छलनी पर अगर दीपक को रख करके चंद्रमा का दर्शन करें तो पति का सौभाग्य और भाग्योदय होता है।

 चंद्रमा को छलनी से देखने की वैज्ञानिक वजह

इस प्रथा के पीछे धार्मिक वजह के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी हो सकता है रात के समय चंद्रमा का जो प्रकाश होता है बहुत ही ज्यादा तेज होता है और उसे सीधा देखने से आंखों पर भी प्रभाव पड़ सकता है इसलिए छलनी के जरिया से चंद्रमा को देखने से जो उसकी रोशनी होती है वह काम हो जाती है और आपकी आंखों को आराम भी मिलता है इसके साथ ही या प्रतीकात्मक रूप से यह भी दिखता है कि आपके जीवन में हर एक कठिनाई या नकारात्मकता को छान करके उसे बचाया जा सकता है जो कि आपके जीवन को सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।

करवा चौथ की पूजा और धार्मिक मान्यता

करवा चौथ पर केवल चंद्रमा का ही पूजा नहीं होता है बल्कि करवा माता, भगवान शिव, पार्वती माता, भगवान गणेश और कार्तिक के जी का भी पूजा किया जाता है उसे दिन। यह भी माना जाता है कि इस दिन सभी देवी देवताओं की पूजा करने से आपके परिवार में सुख समृद्धि आता है और जितने भी पति-पत्नी है उनके बीच का जो रिश्ता है और भी ज्यादा मजबूत होता है करवा माता का जो पूजन करते हैं उसे समय पति की यह भी माना जाता है कि इस दिन सभी देवी देवताओं की पूजा करने से आपके परिवार में सुख समृद्धि आता है और जितने भी पति-पत्नी है उनके बीच का जो रिश्ता होता है और भी ज्यादा मजबूत हो जाता है करवा माता का पूजा करने से पति की दीर्घायु की कामना भी पूरी हो जाती है और गणेश जी की जो उपासना करते हैं उसे हमारे जीवन में समृद्धि और बुद्धि का वास होता है।

 छलनी से चांद देखने की परंपरा का आधुनिक संदर्भ

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आज के समय में भी इस सब परंपरा का महत्व कम नहीं हुआ है आधुनिक समाज में भी जितनी भी महिलाएं हैं वह करवा चौथ के व्रत को पूरे ही श्रद्धा और आस्था के साथ निभाती हैं चाहे कोई भी कितना भी व्यस्त हो इस दिन की तैयारी और पूजा के प्रति उत्साह हर एक महिला में समान रूप से देखने को मिलता है इस दिन खास करके महिलाएं पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं 16 श्रृंगार भी करती है और अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए कामना भी करते हैं।

करवा चौथ व्रत का संदेश

करवा चौथ का जो व्रत होता है न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि या पति-पत्नी के बीच प्रेम और समर्पण और अटूट विश्वास का भी प्रतीक है इस व्रत के जरिए से जितनी भी महिलाएं हैं वह आज्ञा संदेश देती है कि हर परिस्थिति में वह अपने पति के साथ खड़ी है और उनकी खुशहाली के लिए वह कुछ भी करने को तैयार है चलने से चांद को देखने की यही परंपरा सिर्फ एक रस्म नहीं है बल्कि यह एक सांस्कृतिक धरोहर भी है जो की पीढ़ी दर पीढ़ी से चला आ रहा है जैसे कि आज भी पूरे उत्साह और भक्ति भाव से निभाया जाता है और किया जाता है।

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