राजस्थान: किसी ने सच ही कहा है कि “मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है”—और इस कहावत को राजस्थान की कोमल पुनिया ने पूरी तरह सच कर दिखाया है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 6 हासिल कर कोमल ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे संसाधनों की कमी भी बेबस हो जाती है।
कोमल पुनिया राजस्थान के एक छोटे से गांव की रहने वाली हैं और एक साधारण किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता खेती करते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। सीमित साधनों के बावजूद कोमल के सपने बड़े थे। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की और आगे की पढ़ाई में भी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया।
गांव में पढ़ाई के दौरान सुविधाओं की कमी जरूर थी, लेकिन कोमल ने कभी हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। हर चुनौती को उन्होंने सीखने का अवसर माना। परिवार का भरोसा और खुद पर अटूट विश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। कोमल के पिता का मानना था कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती, और यही सोच उनकी सफलता की नींव बनी।
आज कोमल पुनिया की यह उपलब्धि उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों से पीछे हट जाते हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।









