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देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को, चतुर्मास में साधना और सत्कर्मों का विशेष महत्व

25 जुलाई, शनिवार से चतुर्मास का शुभारंभ होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु के शयन के साथ चतुर्मास प्रारंभ होता है। यह अवधि साधना, जप, ध्यान, सत्संग, सेवा, दान-पुण्य और आत्मसंयम के लिए विशेष मानी जाती है। विद्यार्थियों को भी इस अवधि में नियमित अध्ययन के साथ मंत्रजप, मौन, ध्यान और सकारात्मक अनुशासन अपनाने की सलाह दी जाती है।

चतुर्मास में भूमि पर शयन, ब्रह्मचर्य पालन, उपवास, मौन, ध्यान, जप, सत्पुरुषों की सेवा, भगवान का पूजन तथा सुपात्रों को दान करना कल्याणकारी बताया गया है। परनिंदा से बचने और धार्मिक ग्रंथों के श्रवण पर भी जोर दिया गया है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान विष्णु के नाम का कीर्तन और जप करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर भी इस अवधि में विराम रहता है।

इस अवसर पर 23 जुलाई को महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती भी मनाई जाती है। 1856 में जन्मे तिलक ने ‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का नारा दिया। वे ‘लाल-बाल-पाल’ त्रयी के प्रमुख सदस्य थे तथा ‘केसरी’ और ‘मराठा’ समाचार पत्रों के माध्यम से राष्ट्रवाद को जन-जन तक पहुंचाया।

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