लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने 2026 में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारियों की शुरुआत करते हुए आज से ग्राम पंचायतों के परिसीमन और पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह बड़ा प्रशासनिक कदम जनसंख्या परिवर्तन, नए शहरी क्षेत्रों के गठन और विकास जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
2,300 से अधिक ग्राम पंचायतें होंगी प्रभावित
- नए नगर पंचायतों और नगर पालिका क्षेत्रों के गठन के कारण बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों की सीमाएं बदली जाएंगी।
- अनुमान है कि 2,300 से अधिक ग्राम पंचायतों पर परिसीमन का सीधा असर पड़ेगा।
प्रमुख तिथियां
- 28-30 जून: जनसंख्या निर्धारण और आंकड़ों का सत्यापन
- 12-14 जुलाई: ग्राम पंचायतों की अंतिम परिसीमन सूची जारी
- 8 जुलाई तक: जिलाधिकारी (DM) शासन को भेजेंगे पुनर्गठन का प्रस्ताव
क्या होगा असर?
- कई ग्राम पंचायतें हटेंगी या विलीन होकर नगर क्षेत्र में शामिल होंगी।
- नई पंचायतों का गठन किया जा सकता है।
- पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण जनता के लिए सीटों के आरक्षण, प्रतिनिधित्व और संसाधन वितरण में बदलाव आ सकता है।
शासन का निर्देश
राज्य सरकार ने सभी जनपदों के जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किया है कि वे 8 जुलाई तक पुनर्गठन से संबंधित विस्तृत प्रस्ताव भेजें, ताकि समय पर अंतिम परिसीमन सूची को अधिसूचित किया जा सके।
क्यों है यह महत्वपूर्ण?
यह प्रक्रिया 2026 में होने वाले पंचायत चुनावों की नींव तैयार करेगी और आने वाले वर्षों में ग्राम स्तर पर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित करेगी। परिसीमन से ग्रामीण राजनीति का नक्शा बदलने की पूरी संभावना है।









