रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का पावन पर्व है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती है, जबकि भाई बहन की रक्षा का संकल्प लेता है। रोली-कुमकुम का तिलक, अक्षत, आरती और मिठाई इस पर्व की परंपराओं को खास बनाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं में भद्रा काल का भी विशेष महत्व है और शुभ मुहूर्त में ही राखी बांधने की परंपरा रही है। राजा बलि और माता लक्ष्मी से जुड़ी पौराणिक कथा भी रक्षाबंधन के महत्व को दर्शाती है।
अजीत कुमार पाण्डेय कहते हैं कि तीन दशक पहले रक्षाबंधन का एक खूबसूरत रूप ‘खत वाली राखी’ हुआ करता था। बहनें डाकघर से राखी, ग्रीटिंग कार्ड और रोली की पुड़िया दूर रह रहे भाइयों को भेजती थीं। हाथ से लिखे संदेश और डाकिए का इंतजार रिश्तों में अपनापन भर देता था।
आज मोबाइल और वीडियो कॉल ने दूरियां घटा दी हैं, लेकिन उन खतों में छिपा प्यार और भावनाएं आज भी अनमोल हैं। पुराने राखी खतों को देखकर आज भी आंखें नम और चेहरे मुस्कुरा उठते हैं।






