वाराणसी। शिव शिष्य हरिंद्रानंद फाउंडेशन द्वारा ऐंड़े रिंग रोड, चांदमारी में भव्य शिव गुरु महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महेश्वर शिव के गुरु स्वरूप को समझाना और अधिक से अधिक लोगों को शिव के शिष्य के रूप में जोड़ना था।

महोत्सव में प्रमुख रूप से संबोधित करते हुए दीदी बरखा आनंद ने कहा कि शिव जगतगुरु हैं और जगत का हर व्यक्ति—चाहे वह किसी भी धर्म या जाति से हो—शिव को अपना गुरु बना सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिव के शिष्य बनने के लिए किसी पारंपरिक प्रक्रिया, औपचारिकता या दीक्षा की आवश्यकता नहीं है। केवल यह दृढ़ विचार कि “शिव मेरे गुरु हैं” — व्यक्ति को शिव का शिष्य बना देता है।
दीदी बरखा आनंद ने शिव का शिष्य बनने के तीन सूत्र भी बताए—
- गुरु स्वीकार: मन ही मन शिव से कहें— “शिव, आप मेरे गुरु हैं, मैं आपका शिष्य हूँ; मुझ पर कृपा करें।”
- विचार का प्रसार: यह समझना और दूसरों को भी समझाना कि शिव ही हमारे गुरु हैं और कोई भी उन्हें अपना गुरु बना सकता है।
- आंतरिक प्रणाम: अपने गुरु शिव को मन ही मन नमः शिवाय मंत्र के साथ प्रणाम करना।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और शिव गुरु महोत्सव की शिक्षाओं से स्वयं को जोड़ते दिखाई दिए।
रिपोर्ट: अशोक कुमार गुप्ता










