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ददरी मेला में दिखेगा बलिया की आस्था, संस्कृति और गौरव का संगम

बलिया। जिले की पहचान बन चुका ऐतिहासिक ददरी मेला इस बार नए और भव्य स्वरूप में दिखाई देगा। जिलाधिकारी ने मेला क्षेत्र का ले-आउट नक्शा स्वीकृत कर इसे मौके पर लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस वर्ष मेला क्षेत्र में आस्था, राष्ट्रीयता और बलिया की सांस्कृतिक धरोहर को केंद्र में रखते हुए विशेष थीम पर आयोजन होगा।

धार्मिक व सांस्कृतिक थीम पर सजेगा मेला क्षेत्र
मेला क्षेत्र के प्रमुख चौराहों को धार्मिक और सांस्कृतिक रूप में सजाया जाएगा। इनमें महर्षि भृगु चौराहा, दर्दर मुनि चौराहा, मां दुर्गा शक्ति चौराहा, श्री गणेश चौराहा, शहीद चौक और सूरजताल स्थल प्रमुख आकर्षण होंगे, जो बलिया की पहचान और परंपरा को प्रदर्शित करेंगे।

भारतेंदु मंच बनेगा सांस्कृतिक केंद्र
मेला में इस बार भी भारतेंदु मंच स्थापित किया जाएगा, जहाँ शास्त्रीय संगीत, नृत्य और लोक विधा की प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी। बलिया की लोक संस्कृति और जनकला की झलक यहां प्रमुख आकर्षण होगी।

सरकारी योजनाओं की प्रदर्शनी से बढ़ेगी जनजागरूकता
मेला में कृषि, समाज कल्याण, पंचायतीराज, स्वास्थ्य और अन्य विभागों द्वारा सरकारी योजनाओं से जुड़ी प्रदर्शनियाँ लगाई जाएंगी, ताकि आगंतुक योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकें।

व्यवसायियों के लिए सुविधाएँ और वेंडरों को जगह
मेला क्षेत्र में 70 फीट चौड़े मार्ग बनाए जा रहे हैं, जिनके बीच में 6×6 फीट के स्थान तहबाजारी वेंडरों के लिए आरक्षित होंगे। इस बार लगभग 2000 फुटकर वेंडर को जगह मिलेगी। साथ ही 700 से अधिक दुकानें लगाई जाएंगी, जो पिछले वर्ष से 100 अधिक हैं। व्यापारियों को प्रति लठ्ठा 10 वाट मुफ्त बिजली भी दी जाएगी।

शिकायत प्रकोष्ठ और कैंप सक्रिय
व्यापारियों की समस्याओं के समाधान हेतु शिकायत प्रकोष्ठ बनाया गया है, जिसकी जिम्मेदारी अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) को दी गई है। दो डिप्टी कलेक्टर सहयोग करेंगे। राजस्व व नगर पालिका टीमों का कैंप भी सक्रिय हो गया है।

सुव्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था
मुख्य मार्गों के किनारे चार पार्किंग स्थल बनाए गए हैं, जिनका ठेका हो चुका है। इनके संचालन में एआरटीओ विभाग सहयोग करेगा ताकि ट्रैफिक सुचारू रहे।

आस्था और गौरव का संगम बनेगा ददरी मेला
इस वर्ष का ददरी मेला सुप्रबंधन, पारदर्शिता, सुविधा, धार्मिक आस्था और राष्ट्रीय गौरव को समर्पित रहेगा। मेला क्षेत्र में व्यवस्था, स्वच्छता और सांस्कृतिक वातावरण के संगम से बलिया की पहचान एक बार फिर निखरकर सामने आएगी।

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