लखनऊ । विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने क्षतिग्रस्त वितरण ट्रांसफार्मरों की मरम्मत पर होने वाले खर्च की जिम्मेदारी अभियंताओं व अधिकारियों पर डालकर वसूली शुरू करने के पावर कॉरपोरेशन के कदम को अन्यायपूर्ण और दमनकारी बताया है।
समिति ने आदेश तत्काल वापस लेने की मांग की। पदाधिकारियों का कहना है कि ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने के पीछे ओवरलोडिंग, लो-वोल्टेज, असंतुलित भार, पुराने ट्रांसफार्मर और बढ़ती बिजली मांग जैसे तकनीकी कारण होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में निजी नलकूपों के बढ़ते भार से भी ट्रांसफार्मरों पर दबाव बढ़ रहा है।
समिति ने कहा कि बिना स्वतंत्र तकनीकी जांच और व्यक्तिगत लापरवाही सिद्ध किए मरम्मत खर्च की वसूली अनुचित है। पर्याप्त क्षमता वाले ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराना और सिस्टम को सुदृढ़ करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है।
कर्मचारियों की कमी के बीच फील्ड कर्मी लगातार विद्युत आपूर्ति बहाल करने में जुटे हैं। समिति ने क्षमता वृद्धि, मानव संसाधन बढ़ाने और वर्टिकल रीस्ट्रक्चरिंग की समीक्षा की मांग करते हुए चेतावनी दी कि आदेश वापस नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा।





