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पूर्वांचल के पिछड़ेपन को दूर किए बिना विकसित भारत की परिकल्पना अधूरी

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उत्तर प्रदेश को भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आत्मा का केंद्र माना जाता है। प्रधानमंत्री द्वारा अमृतकाल में विकसित भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक पूर्वांचल के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह सपना अधूरा रहेगा।

ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि “भारत अगर दुनिया का ब्राइट स्पॉट है तो उत्तर प्रदेश उसकी ग्रोथ ड्राइव है।” इसी आधार पर 2047 तक यूपी को देश का अग्रणी और विकसित राज्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

हालांकि, उद्योग विभाग और बैंकों की धीमी कार्यशैली को विकास में बाधा बताया जा रहा है। लाभार्थी योजनाओं का लाभ पाने के लिए आम लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि अर्थशक्ति, सृजनशक्ति और जीवनशक्ति का संतुलित विकास ही आत्मनिर्भर व समृद्ध उत्तर प्रदेश की कुंजी है।

पिछले 8 वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

  • जीएसडीपी 22 गुना बढ़कर लगभग 30 लाख करोड़ पहुंची।
  • विकास दर 8% से बढ़कर 9.5% हुई।
  • निर्यात 2016-17 के 84 हजार करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 1.80 लाख करोड़ हो गया।
  • कर संग्रह में यूपी देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बन गया।

फिर भी ग्रामीण व गरीब तबका अभी भी सौर ऊर्जा योजनाओं जैसे लाभ से वंचित है। प्राकृतिक आपदाओं और कृषि संकट ने किसानों की हालत और कमजोर की है।

विशेषज्ञों ने कहा कि यदि पूर्वांचल के लिए अलग पैकेज तैयार किया जाए और शिक्षक, कृषक, श्रमिक व प्रबुद्धजनों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए, तभी 2047 का आत्मनिर्भर भारत का विज़न साकार हो सकेगा।

रिपोर्ट- इफ्तेखार हाशमी

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