वाराणसी। काशी में जारी एक नागरिक समाज तथ्य-अन्वेषण समिति की रिपोर्ट में प्रयागराज माघ मेला 2026 के दौरान ज्योतिर्मठ शंकराचार्य की शोभायात्रा रोके जाने की घटना को राज्य शक्ति के दुरुपयोग और धार्मिक स्वायत्तता में हस्तक्षेप का गंभीर मामला बताया गया है। समिति में पूर्व सीबीआई निदेशक एम. नागेश्वर राव, प्रोफेसर मधु किश्वर तथा सामाजिक कार्यकर्त्री ऋतु राठौर शामिल हैं। रिपोर्ट 12 मई 2026 को काशी में सार्वजनिक की गई।

प्रतिवेदन के अनुसार, 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के अवसर पर ज्योतिर्मठ शंकराचार्य पारंपरिक पालकी शोभायात्रा के माध्यम से संगम स्नान के लिए जा रहे थे। यात्रा प्रशासन की पूर्व जानकारी और पुलिस सुरक्षा के बीच शांतिपूर्वक आगे बढ़ रही थी, लेकिन संगम के निकट वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने शोभायात्रा रोककर शंकराचार्य से पालकी से उतरने को कहा। समिति ने प्रशासन द्वारा दी गई भगदड़ की आशंका को असंगत बताते हुए कहा कि वीडियो साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों में ऐसी कोई स्थिति नहीं दिखी।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि श्रद्धालुओं और वेद विद्यार्थियों के साथ बल प्रयोग किया गया तथा धार्मिक गरिमा को ठेस पहुँचाई गई। समिति के अनुसार यह केवल भीड़ नियंत्रण नहीं, बल्कि धार्मिक परंपरा में जानबूझकर हस्तक्षेप था। प्रतिवेदन में बाद में जारी नोटिस, पॉक्सो अधिनियम सहित आपराधिक मामलों तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय में राज्य के रुख का भी उल्लेख किया गया है।
समिति ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का हवाला देते हुए धार्मिक मामलों में राज्य हस्तक्षेप सीमित करने की मांग की तथा “उत्तर प्रदेश हिंदू धर्म परिषद” के गठन का प्रस्ताव रखा। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शंकराचार्य से संवाद, सार्वजनिक क्षमा-याचना और सुरक्षा बढ़ाने की अनुशंसा की गई।










