वाराणसी। वसंत महिला महाविद्यालय, राजघाट (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विशेषाधिकार के अंतर्गत) के संगीत विभाग (गायन एवं वादन) द्वारा पाँच दिवसीय सांगीतिक कार्यशाला का शुभारंभ वसंत सभागार में किया गया। कार्यशाला का विषय “उपशास्त्रीय संगीत शैली : पूरब अंग” रखा गया है। इसका उद्देश्य छात्राओं एवं शोधार्थियों को पूरब अंग की समृद्ध सांगीतिक परंपरा, शैलीगत विशेषताओं और व्यावहारिक पक्षों से अवगत कराना है।

कार्यशाला के प्रथम दिवस की मुख्य वक्ता एवं विषय विशेषज्ञ प्रो. संगीता पंडित, संकाय प्रमुख एवं विभागाध्यक्ष, गायन विभाग, संगीत एवं मंच कला संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने पूरब अंग के इतिहास, विकास यात्रा तथा ठुमरी, दादरा, कजरी, चैती और होरी जैसी शैलियों की विशेषताओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि पूरब अंग भारतीय संगीत की भावप्रधान परंपरा है, जिसमें शब्द, राग और भाव का सुंदर समन्वय होता है।

उन्होंने व्यावहारिक प्रस्तुति के माध्यम से गायन की बारीकियों, उच्चारण, लय और भावाभिव्यक्ति का प्रदर्शन किया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. अलका सिंह ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ छात्राओं के सर्वांगीण विकास और भारतीय सांगीतिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

कार्यशाला में छात्राओं, शोधार्थियों एवं संगीत विभाग के शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रथम दिवस का सत्र ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी रहा।
ब्यूरो चन्दौली संजय शर्मा।









