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लॉर्ड विश्वेश्वर केस: कोर्ट ने कहा वादी के पुत्र नहीं बन सकते पक्षकार, अर्जी खारिज, 3 दिसंबर को सुनवाई

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वाराणसी: विशेष न्यायाधीश (आवश्यक वस्तु अधिनियम) मनोज कुमार सिंह-II की अदालत ने 1991 से लंबित लॉर्ड विश्वेश्वर केस में वादी हरिहर पांडेय के निधन के बाद उनके बेटों को पक्षकार बनाने संबंधी निगरानी अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की विधिक या तात्विक त्रुटि नहीं है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सिविल जज सीनियर डिवीजन (फास्ट ट्रैक) ने अपने क्षेत्राधिकार का विधि-सम्मत उपयोग करते हुए यह आदेश पारित किया है। निचली अदालत द्वारा 28 फरवरी 2024 को पारित आदेश में सभी आवश्यक विधिक प्रावधानों और साक्ष्यों का गहन अध्ययन किया गया था। इसके खिलाफ दायर निगरानी अर्जी में कोई ठोस आधार प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके चलते इसे खारिज कर दिया गया।

इससे पहले, हरिहर पांडेय के निधन के बाद उनके बेटों प्रणय कुमार पांडेय और करण शंकर पांडेय ने मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने की अपील की थी। यह अपील सिविल जज सीनियर डिवीजन (फास्ट ट्रैक) की अदालत में खारिज कर दी गई थी। इस आदेश के खिलाफ जिला जज की कोर्ट में निगरानी अर्जी दाखिल की गई, जिसे भी निरस्त कर दिया गया।

सुनवाई 3 दिसंबर को
लॉर्ड विश्वेश्वर केस से जुड़े एक अन्य मामले में 3 दिसंबर को अगली सुनवाई तय की गई है। इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान वादी सोमनाथ व्यास के निधन के बाद उनके भतीजे योगेंद्र नाथ व्यास ने मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने की अर्जी दी थी। इस पर बहस पूरी हो चुकी है। अब लॉर्ड विश्वेश्वर के वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से बहस की जाएगी। यह मामला 1991 से लंबित है और इससे जुड़े कानूनी विवाद लंबे समय से चर्चा का विषय बने हुए हैं। अदालत में लगातार हो रही सुनवाइयों से इसके समाधान की उम्मीद की जा रही है।

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