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देवरिया: गविष्टि (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध) का तृतीय दिवस सम्पन्न, शंकराचार्य का उद्बोधन

देवरिया: गविष्टि (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध) का तृतीय दिवस वैकुंठपुर स्थित श्री राम मंदिर में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के सान्निध्य में एक विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें विद्वानों, संस्कृत विद्यार्थियों एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के दौरान मुंडेरा बाबू, बंजरिया चौराहा रोड, कंचनपुर चौराहा, कसया रोड, सोनुघाट चौराहा एवं लक्ष्मी नारायण मंदिर-शिवबनकटा सहित विभिन्न स्थानों पर जनसमुदाय ने उत्साहपूर्वक स्वागत करते हुए गौ रक्षा का संकल्प लिया।

अपने संबोधन में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ संरक्षण को समाज का कर्तव्य और सांस्कृतिक दायित्व बताया। उन्होंने कहा कि गौ रक्षा के लिए केवल प्रतीकात्मक प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि ठोस नीतियां एवं प्रभावी कानून बनाए जाने आवश्यक हैं। उन्होंने गौ माता को “राष्ट्र माता” घोषित किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में बीफ निर्यात के मुद्दे पर गंभीर विचार की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि गौ संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आगामी 24 जुलाई को लखनऊ में एक विशाल जनसमूह के साथ आगे की रणनीति की घोषणा की जाएगी।

शंकराचार्य जी ने बताया कि उन्होंने राज्य सरकार के समक्ष गाय को “राज्य माता” घोषित करने एवं उसे सामान्य पशु श्रेणी से अलग सम्मानजनक स्थान देने की मांग रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में गाय की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रशासनिक एवं सामाजिक स्तर पर संवेदनशीलता आवश्यक है।

अपने उद्बोधन में उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों की नीतियों पर भी टिप्पणी करते हुए भारतीय सनातन परंपरा आधारित राजनीतिक विचारधारा को सशक्त करने का आह्वान किया। साथ ही स्पष्ट किया कि साधु-संत सीधे सत्ता पद ग्रहण नहीं करते, बल्कि समाज को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम के अंत में ऋग्वेद मंत्रों के साथ सामूहिक संकल्प लिया गया, जिसमें गौ रक्षा के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया। आयोजन समिति की ओर से सभी उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया गया।

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