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गौ माता को सम्मान दिलाने के लिए मतदान ही समाधान, कानपुर में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का आह्वान

कानपुर । 81 दिवसीय ‘गोप्रतिष्ठा (गौ रक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ यात्रा के तहत कानपुर पहुंचे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ संरक्षण और गौ सम्मान को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान प्रदेश की 100 से अधिक विधानसभाओं में लाखों लोगों से संवाद किया गया, लेकिन एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिला जिसने गौ को माता मानने से इनकार किया हो। इसके बावजूद सरकारें गौ को केवल पशु की श्रेणी में रखती हैं, जो जनभावनाओं के विपरीत है।

शंकराचार्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ केवल दूध देने वाला पशु नहीं, बल्कि आस्था, समृद्धि और जीवन मूल्यों की आधारशिला है। उन्होंने रघुवंश का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के कुल को जो सम्मान, वैभव और गौरव प्राप्त हुआ, उसके मूल में गौ सेवा की परंपरा रही है। भारतीय सभ्यता की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना में गौ का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 48 में भी गौ संरक्षण का प्रावधान है, इसलिए उनकी मांग कोई नई या असंवैधानिक नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी राजनीतिक दल या प्रत्याशी गौ को माता घोषित करने और गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की दिशा में ठोस कदम उठाएगा, वही जनसमर्थन का अधिकारी होगा।

इस अवसर पर बिठूर विधानसभा क्षेत्र में गौधाम निर्माण और जनजागरण अभियान के लिए सामाजिक कार्यकर्ता मनोज कुमार को प्रतिनिधि नियुक्त किया गया। वे गांव-गांव जाकर जनसहयोग से गौधाम निर्माण की योजना को आगे बढ़ाएंगे।

सभा में उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से गौ माता की रक्षा और सम्मान का संकल्प लिया तथा वैदिक मंत्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का उच्चारण किया। शंकराचार्य ने चेतावनी दी कि यदि 24 जुलाई तक सरकार द्वारा ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो लखनऊ में विशाल धर्मसभा के माध्यम से आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी।

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