नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम निर्णय देते हुए स्पष्ट कर दिया कि तलाकशुदा मुस्लिम महिला को वह नकद राशि और सोने के गहने वापस पाने का पूरा अधिकार है, जो उसके पिता ने शादी के समय उसके पति को दिए थे। अदालत ने कहा कि यह रकम और सामान मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 की परिधि में संरक्षित हैं और महिला उन्हें वापस लेने की अधिकारी है।
मामला क्या है?
यह मामला पश्चिम बंगाल की रौशनारा बेगम से जुड़ा है, जिनकी शादी अगस्त 2005 में हुई थी। शादी के कुछ वर्ष बाद ही दंपत्ति के संबंध खराब हो गए और मई 2009 में रौशनारा ससुराल छोड़कर मायके आ गईं। बाद में दिसंबर 2011 में दोनों का तलाक हो गया।
तलाक के बाद रौशनारा बेगम ने 1986 के कानून की धारा 3 के तहत दावा दायर करते हुए कहा कि शादी के समय उनके पिता ने पति को 17,67,980 रुपये और 30 भोरी सोने के गहने दिए थे, जिनकी वापसी उन्हें नहीं की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि शादी के समय पिता द्वारा दिया गया पैसा और सोना महिला की संपत्ति माना जाएगा, और तलाक के बाद उसे इसकी वापसी का पूर्ण अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसलों को सही ठहराते हुए साफ किया कि यह दावा मुस्लिम महिला के वैध अधिकारों के दायरे में आता है।









