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बलिया: श्रीमद्भागवत कथा में सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन, श्रद्धालु हुए भाव-विभोर

बलिया। मुरलीछपरा ब्लॉक क्षेत्र अंतर्गत रामानुज आश्रम शिवपुर कपूर दीयर, सेमरिया में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सह लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के सातवें दिन वृंदावनधाम से पधारे प्रख्यात कथावाचक स्वामी चतुर्भुजाचार्य जी महाराज ने सुदामा चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

कथा के दौरान स्वामी जी ने कहा कि सुदामा भगवान श्रीकृष्ण के बाल सखा थे, जो अत्यंत निर्धन, सरल, विनम्र और सच्चे ब्राह्मण थे। पत्नी के आग्रह पर वे अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका गए। उपहार स्वरूप उनके पास केवल थोड़े से चिउड़े थे, जिन्हें उन्होंने संकोचवश छिपाकर रखा। भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा को पहचानते ही प्रेमपूर्वक गले लगाया और उनके लाए चिउड़े को बड़े आनंद से ग्रहण किया। सुदामा कुछ मांग नहीं सके, किंतु भगवान ने बिना मांगे ही उनका जीवन बदल दिया।

स्वामी चतुर्भुजाचार्य जी ने कहा कि जब सुदामा अपने घर लौटे तो झोपड़ी के स्थान पर भव्य महल देखकर आश्चर्यचकित रह गए। यह प्रसंग सिखाता है कि सच्ची मित्रता, निष्काम भक्ति और विनम्रता से भगवान स्वयं अपने भक्त का कल्याण करते हैं।

यह आयोजन बैकुंठवासी श्री श्री 1008 श्री कमल नयन ब्रह्मचारी जी की 12वीं पुण्य तिथि के अवसर पर किया गया। स्वामी जी ने भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला, उद्धव-गोपी संवाद, परीक्षित मोक्ष एवं कलियुग के प्रभाव पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण मानव जीवन को सत्य, भक्ति और मोक्ष का मार्ग दिखाता है, तथा भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाती हैं।

कथा के दौरान भजन-कीर्तन, हरिनाम संकीर्तन और जयकारों से पंडाल गूंज उठा। श्रद्धालु कथा श्रवण कर भाव-विभोर हो उठे और वातावरण बार-बार “हरि बोल” के नारों से गूंजता रहा। सातवें दिन यज्ञ की पूर्णाहुति, हवन, आरती एवं प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया गया।

कथा समापन अवसर पर आयोजकों एवं यजमानों ने श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजन समिति ने बताया कि सात दिवसीय भागवत कथा के माध्यम से क्षेत्र में धर्म, भक्ति और संस्कारों का व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ है। कल संत समागम एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

रिपोर्ट- आनन्द मोहन मिश्रा

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