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लखनऊ में शंकराचार्य का धर्मयुद्ध शंखनाद, 3 मई से यूपी में 81 दिवसीय ‘समग्र गविष्ठि गोयुद्ध यात्रा’ का ऐलान

लखनऊ। 11 मार्च। राजधानी लखनऊ के मान्यवर कांशीराम स्मृति स्थल मैदान में आयोजित ‘धर्मयुद्ध शंखनाद’ कार्यक्रम में उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ‘1008’ ने कहा कि धर्म का पालन जितना आवश्यक है, उतना ही जरूरी अधर्म का प्रखर विरोध भी है। उन्होंने कहा कि अन्याय और अधर्म को सहने से ही समाज में पाप बढ़ता है, इसलिए समाज को अन्याय के खिलाफ जागरूक होकर खड़ा होना चाहिए।

इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि गौ-माता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने और गौ-हत्या के कलंक को समाप्त करने के उद्देश्य से आगामी 3 मई से पूरे उत्तर प्रदेश में 81 दिवसीय ‘समग्र गविष्ठि गोयुद्ध यात्रा’ प्रारंभ की जाएगी। उन्होंने ‘गविष्ठि’ शब्द की वैदिक व्याख्या करते हुए कहा कि यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि गौ-वंश की प्रतिष्ठा और संरक्षण के लिए चलाया जाने वाला एक धर्म अभियान है।

जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि शास्त्रों में अन्याय का प्रतिकार करना ही सनातन धर्म बताया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राजा परीक्षित ने गौ-माता के सम्मान की रक्षा के लिए कलियुग को दंडित किया था। उन्होंने कहा कि जिस राज्य में गाय पीड़ा में होती है, उस राज्य का विनाश निश्चित माना गया है।उन्होंने संत समाज और वेशधारियों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि संन्यासी और विरक्तों का पद-लोलुप होना दानवी प्रवृत्ति है।

धर्म की शपथ लेने के बाद धर्मनिरपेक्षता की शपथ लेना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग दोनों प्रकार की शपथ लेकर भ्रम पैदा करते हैं, उन्हें किसी एक मार्ग पर स्पष्ट रूप से स्थिर होना चाहिए।कार्यक्रम में उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी’ के गठन की भी घोषणा की, जो संत समाज में व्याप्त अशास्त्रीयता और अधर्म को दूर करने का कार्य करेगी।

संजय पांडेय रिपोर्टर।

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