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काशी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का भव्य समापन, सांस्कृतिक विरासत से विकास का संदेश

वाराणसी। 05 अप्रैल 2026, वाराणसी मध्य प्रदेश शासन के संस्कृत विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से आयोजित सम्राट विक्रमादित्य पर आधारित तीन दिवसीय महानाट्य का भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के बाद यदि किसी लोकमान्य नायक का नाम लिया जाता है, तो वह उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य हैं। उन्होंने विक्रमादित्य को पहला स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए उनके शौर्य, न्यायप्रियता और विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध उनके पराक्रम का उल्लेख किया।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश मिलकर “विरासत से विकास” की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक बताया।

कार्यक्रम में विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति, उज्जैन के अध्यक्ष राजेश कुशवाहा ने कहा कि इस महानाट्य का उद्देश्य सम्राट विक्रमादित्य की गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। वहीं पंडित नरेश शर्मा ने काशी की पावन भूमि से मिले स्नेह को प्रेरणादायक बताया। महानाट्य के निर्देशक संजीव मालवीय ने इसे अपने जीवन का अलौकिक अनुभव बताया और दर्शकों के उत्साह को भारतीय संस्कृति की जीवंतता का प्रमाण कहा।

महानाट्य से पूर्व मध्य प्रदेश के लोक कलाकारों ने मालवा की मटकी, निमाड़ का गणगौर, डिंडोरी का गुदम्बबाजा, सागर का बरेदी और उज्जैन का डमरू जैसे लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। इसके साथ ही बीएलडब्ल्यू मैदान में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें आर्ष भारत, शिव पुराण, चौरासी महादेव, श्री हनुमान और मध्य प्रदेश के पवित्र स्थलों की जानकारी दी गई।

प्रदर्शनी ने युवाओं को विशेष रूप से आकर्षित किया। छात्र-छात्राओं ने इसे ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया। कई लोगों ने पहली बार सम्राट विक्रमादित्य से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को जाना।

समापन अवसर पर आयोजकों ने उत्तर प्रदेश सरकार, वाराणसी जिला प्रशासन तथा रेलवे एवं पुलिस विभाग के अधिकारियों का सफल आयोजन में सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

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