वाराणसी। Rashmi Singh ने सेवा और समर्पण की मिसाल पेश करते हुए महज 35 वर्ष की आयु में 42 बार स्वैच्छिक रक्तदान कर एक अनूठा कीर्तिमान स्थापित किया है। उनके इस योगदान से अब तक 168 लोगों को जीवनदान मिल चुका है, जिससे वे महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरी हैं।
स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में सक्रिय संस्था Sadhana Foundation के महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्यरत रश्मि सिंह ने यह साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति और संकल्प के बल पर कोई भी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई जा सकती है।
संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष Dr. Saurabh Maurya ने उनकी सराहना करते हुए कहा कि रश्मि सिंह का योगदान केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता की सेवा का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जहां आमतौर पर महिलाएं एक या दो बार ही जीवन देती हैं, वहीं रश्मि सिंह ने 42 बार रक्तदान कर 168 लोगों को नया जीवन दिया है।
रश्मि सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस सामाजिक कार्य में उन्हें अपने पति और परिवार का पूरा सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि वे भविष्य में भी नियमित रूप से रक्तदान करती रहेंगी और 100 बार रक्तदान करने का लक्ष्य हासिल करना चाहती हैं।
उन्होंने यह भी दिखाया कि पारिवारिक जिम्मेदारियों और जीवन की चुनौतियों के बावजूद समाजसेवा को प्राथमिकता दी जा सकती है। उनका यह कार्य न केवल रक्तदान के क्षेत्र में, बल्कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता के लिए भी एक मजबूत संदेश है।
रश्मि सिंह की यह उपलब्धि यह साबित करती है कि यदि नारी संकल्प ले ले, तो वह समाज में बदलाव की सशक्त धारा बन सकती है।








