वाराणसी। जनपद में शनिवार को वट सावित्री व्रत और ज्येष्ठ अमावस्या श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाई गई। इस वर्ष वट सावित्री व्रत के साथ शनि जयंती का दुर्लभ संयोग बनने से पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया। दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के मीरघाट स्थित काशी खंडोक्त कंचन वट वृक्ष एवं माता सावित्री मंदिर में सुबह से ही सुहागिन महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी।
महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ व्रत रखा तथा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।पूजा के दौरान महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत और मौली बांधी तथा वट सावित्री व्रत कथा का श्रवण किया। मंदिर परिसर पूरे दिन भक्ति और श्रद्धा के माहौल से गूंजता रहा।

काशी तीर्थ पुरोहित सभा के अध्यक्ष एवं मंदिर के प्रधान पुरोहित पं. कन्हैया लाल त्रिपाठी ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, मध्य भाग में भगवान विष्णु और शीर्ष पर भगवान शिव का वास होता है। उन्होंने कहा कि माता सावित्री ने इसी वट वृक्ष के नीचे तप कर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे, तभी से यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है।









