वाराणसी । भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) एवं भारतीय रेलवे मजदूर संघ (बीआरएमएस), नई दिल्ली के आह्वान पर बरेका स्थित डीएलडब्ल्यू मजदूर संघ के नेतृत्व में गुरुवार को भारतीय रेलवे में 2 प्रतिशत तकनीकी एवं गैर-तकनीकी पदों को सरेंडर किए जाने तथा बरेका में बढ़ती आउटसोर्सिंग, ऑफलोडिंग और ठेकेदारी प्रथा के विरोध में व्यापक धरना-प्रदर्शन किया गया। आंदोलन के तहत 22 मई से 29 मई 2026 तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसके समापन पर कारखाने के पश्चिमी द्वार पर कर्मचारियों ने धरना दिया और बाद में महाप्रबंधक को रेलवे बोर्ड अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी के नाम संबोधित मांग पत्र सौंपा।

सभा को संबोधित करते हुए डीएलडब्ल्यू मजदूर संघ के महामंत्री कृष्ण मोहन तिवारी ने कहा कि रेलवे बोर्ड द्वारा 24 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के तहत रेलवे में 2 प्रतिशत पदों को सरेंडर करने का निर्णय कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि बरेका में मनमाने ढंग से आउटसोर्सिंग और ठेकेदारी व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों पर कार्यभार कई गुना बढ़ गया है। इससे कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ रही है।

भारतीय मजदूर संघ के काशी प्रांत प्रमुख राकेश कुमार पांडेय ने कहा कि आउटसोर्सिंग के खिलाफ संघर्ष में सभी कर्मचारियों को एकजुट होना होगा और संगठन हर लड़ाई में उनके साथ खड़ा रहेगा। कर्मचारी परिषद सदस्य नवीन कुमार सिन्हा ने कहा कि जब तक सरकार पद सरेंडर करने का आदेश वापस नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

सभा की अध्यक्षता राहुल पांडेय ने, संचालन कृष्ण मोहन तिवारी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन नवीन सिन्हा ने किया। इस अवसर पर सैकड़ों कर्मचारी उपस्थित रहे और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।






