बलिया । जिले में स्थित बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर धार्मिक आस्था, पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक रहस्यों का अनूठा केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यह स्वयंभू शिवलिंग है, जो धरती से स्वयं प्रकट हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार महर्षि भृगु ने इसी पावन भूमि पर भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उनके आराध्य होने के कारण इस क्षेत्र में विराजमान शिवलिंग को ‘बालेश्वर’ नाम मिला।
स्थानीय जनश्रुतियों में यह भी कहा जाता है कि प्राचीन समय में मंदिर से गंगा तट और अन्य ऐतिहासिक स्थलों तक जाने वाली गुप्त सुरंगें थीं, जिन्हें बाद में सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया। यद्यपि इन सुरंगों के संबंध में ठोस ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी यह कथा आज भी लोगों की आस्था और जिज्ञासा का विषय बनी हुई है।
सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। बलिया ही नहीं, बल्कि बिहार सहित दूर-दराज़ के राज्यों से भी श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना लेकर पहुंचते हैं।
सदियों पुरानी परंपरा, गहरी आस्था और रहस्यमयी कथाओं के कारण बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर आज भी पूर्वांचल के प्रमुख शिवधामों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।
ब्यूरो बलिया अवधेश यादव।






