जालौन । एवं झांसी में आयोजित ऐतिहासिक 81 दिवसीय ‘गविष्ठि (गौ-रक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ यात्रा के दौरान जनसैलाब उमड़ पड़ा। उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने विशाल जनसभाओं को संबोधित करते हुए गौ-रक्षा को राष्ट्रधर्म बताते हुए लोगों से जागरूक मतदान का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनता के वोट से बनने वाली सरकारें यदि गौ-हत्या रोकने में विफल रहती हैं तो मतदाताओं को भी इस विषय पर आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो भी राजनीतिक दल, नेता या संगठन गौ-माता की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध नहीं है, उससे समाज को जवाब मांगना चाहिए।

सभा में उपस्थित हजारों लोगों ने वैदिक मंत्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण करते हुए गौ-रक्षा का संकल्प लिया। शंकराचार्य ने लोगों से प्रतिदिन इस मंत्र का स्मरण करने और गौ-संरक्षण के लिए सामाजिक चेतना बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि गौ-माता केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की आधारशिला हैं।

कार्यक्रम के दौरान लोगों से यह घोषणा भी कराई गई कि गौ-माता के विरोध या उनके संरक्षण की उपेक्षा करने वाले किसी भी संत, दल या नेता से उनका कोई संबंध नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि गौ-रक्षा ही किसी भी सरकार और जनप्रतिनिधि की निष्ठा की सबसे बड़ी कसौटी है।
गोरखपुर से 3 मई 2026 को प्रारंभ हुई यह यात्रा प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं से होकर गुजर रही है। शंकराचार्य ने घोषणा की कि यदि 24 जुलाई तक गौ-रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो लखनऊ में विशाल धर्म-सैनिक सम्मेलन आयोजित कर आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी।





