लखनऊ । उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में शक्ति भवन, लखनऊ में प्रबंधन और कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों के बीच हुई वार्ता में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी। बैठक में तय किया गया कि प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर चार संविदा उपकेंद्र परिचालक और दो परिचालक सहायकों की तैनाती की जाएगी। आउटगोइंग फीडरों के अनुपात में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाएगी तथा हटाए गए कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर कार्य पर वापस लिया जाएगा।
वार्ता में यह भी सहमति बनी कि अकुशल कर्मचारियों से लाइन का कार्य नहीं कराया जाएगा और दबाव बनाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। मई 2025 के आंदोलन के दौरान हटाए गए शेष 44 कर्मचारियों की बहाली, कुशीनगर के कर्मचारियों के बकाया वेतन का भुगतान, फेस अटेंडेंस के कारण रुके वेतन का निस्तारण तथा सीतापुर में विवादित स्थानांतरण पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। विद्युत उपकेंद्रों पर ड्यूटी चार्ट भी अनिवार्य रूप से लगाया जाएगा।
इसके अलावा, ईपीएफ घोटाले में संबंधित कंपनियों की जब्त प्रतिभूति से राशि काटकर कर्मचारियों के भविष्य निधि खातों में जमा कराने पर सहमति बनी। हालांकि, आउटसोर्स कर्मचारियों को 60 वर्ष तक सेवा देने, यूपीपीसीएल को आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल करने तथा मीटर रीडरों को अन्य आउटसोर्स कर्मचारियों के समान वेतन, ईपीएफ और ईएसआई लाभ देने की मांगों पर सहमति नहीं बन सकी।
बैठक में प्रबंधन की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों तथा कर्मचारी संगठन की ओर से प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद खालिद, महामंत्री देवेन्द्र कुमार पाण्डेय सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
ब्यूरो लखनऊ अजय सिंह।






