वाराणसी: उत्तर भारत के वाराणसी में बढ़ती गर्मी का सीतम जारी है, यही कारण है कि इंसान तो इंसान जानवर भी परेशान है, ऐसे में भूख, प्यास, लू और तपन का एहसास होने लगा है जानवर बोल नहीं सकते लेकिन इशारों में कह सकते हैं कि हम गौतम बुद्ध की उपदेशस्थली सारनाथ में बने चिड़ियाघर के बाशिंदे हैं साहब यहीं खाना, यहीं पीना और यहीं जीना है।
हालात कुछ ऐसे हो गए कि चटख धूप में खाने के लिए आज नरम दूब नसीब नहीं हो सकी। भूमि भी इस तपते काल में हमारा साथ छोड़ चुकी है। तभी शायद बुद्ध की नजर हमपर पड़ा। एक भले मानुस ने बाहर से कुछ हरी घास हमारे सामने डाल दी। वैसे तो हमारी संख्या के हिसाब से यह काफी कम थी, लेकिन जो कुछ मिला, किस्मत से मिला। इस समय वाराणसी में लू और कड़क धूप में सबको परेशान कर रखा है इंसानों के साथ-साथ जानवरों पर भी असर देखने को मिल रहा है यही हाल है वाराणसी के सारनाथ जू चिड़ियाघर का।
वाराणसी के चिड़ियाघर में पर्यटकों को लुभाने और आकर्षित दृश्य दिखाने के लिए जानवर रखे गए हैं और प्रतिदिन हजारों की तादाद में पर्यटक और यात्री सारनाथ के चिड़ियाघर देखने के लिए आते हैं लेकिन लू और तपती गर्मी ने इंसानों के साथ-साथ जानवरों पर भी अपना सितम छा दिया है।
इस मामले में जब सारनाथ चिड़ियाघर के केयरटेकर अमित दुबे से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हम लोग यहां पर जानवरों की देखरेख करते हैं समय-समय पर उन्हें जो खाने की सामग्री है वह भी देते हैं ताकि जानवरों पर कड़ी धूप का असर न पड़े क्योंकि वह छोटे जीव तो हैं लेकिन इंसानों की तरह गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं उनके लिए हम लोगों ने अलग से व्यवस्था की है।
हिरण के लिए छप्पर डालकर पानी की और खाने पीने की उचित व्यवस्था की है, पक्षीयों के लिए मटकी में पानी और घोसले का इंतजाम किया है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां कई प्रकार के जानवर हैं जैसे काला हिरण, सफेद हिरण, शुतुरमुर्ग, जेब्रा, मगरमच्छ, घड़ियाल जैसे हजारों जानवर चिड़ियाघर में रखे गए हैं जो पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र बनते हैं उनके खाने-पीने के लिए जो गर्मी से बचा सके उचित इंतजाम किए गए हैं।









