वाराणसी: पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में लगातार 285 दिनों से चल रहा आंदोलन आज भी वाराणसी में जारी रहा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए आगरा की बिजली व्यवस्था टोरेंट पावर को दिए गए करार को तत्काल रद्द करने की मांग उठाई।

संघर्ष समिति के वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कैग (CAG) ने 2015 में अपनी रिपोर्ट में आगरा फ्रेंचाइजी की बिडिंग प्रक्रिया को गलत करार देते हुए इसे निरस्त करने की सिफारिश की थी, लेकिन उस रिपोर्ट को दबा दिया गया। परिणामस्वरूप पावर कॉरपोरेशन को हर साल हजारों करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा –
- आगरा फ्रेंचाइजी करार के चलते पावर कॉरपोरेशन को अब तक 3432 करोड़ रुपए की हानि हो चुकी है।
- कैग ने अनुमान जताया था कि अनुबंध की अवधि में निगम को 4601 करोड़ रुपए का नुकसान होगा।
- आरएफपी (RFP) में जानबूझकर गलत आंकड़े प्रस्तुत किए गए, जिससे टोरेंट पावर को सस्ती दरों पर बिजली मिल रही है।
- यह घोटाला उजागर होने के बावजूद सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि आगरा फ्रेंचाइजी की बिडिंग में हुए घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही पूर्वांचल और दक्षिणांचल निगम के निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की अपील की।

सभा को ई. मायाशंकर तिवारी, ई. एस.के. सिंह, दीपक गुप्ता, नेहा कुमारी, लोकनाथ कुशवाहा सहित कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया और आंदोलन को और तेज करने का संकल्प दोहराया।











