नई दिल्ली: दिल्ली में कंस्ट्रक्शन साइट पर मज़दूरी करने वाले 35 वर्षीय रोहित ने हाल ही में स्पीति में आयोजित 77 किमी की मैराथन में दूसरा स्थान हासिल कर सबको चौंका दिया। रोज़ाना सिर पर ईंट उठाकर चौथी मंज़िल तक पहुँचाने वाले रोहित की दिहाड़ी महज़ 1000–1200 रुपये है, लेकिन उनका सपना इससे कहीं बड़ा है—भारत के लिए ओलंपिक में मेडल जीतना।
लॉकडाउन के दौरान रोहित ने यूट्यूब पर मैराथन देखनी शुरू की थी। 2021 से अब तक वह 100 से अधिक मैराथन दौड़ चुके हैं। पिछले छह महीनों में ही उन्होंने सात से अधिक प्रतियोगिताओं में पोडियम फिनिश हासिल किया है। स्पीति मैराथन में उनके प्रदर्शन से प्रभावित होकर सेना ने भी उनकी मदद का आश्वासन दिया है।
रोहित का रूटीन बेहद कठिन है। वह रोज़ सुबह 3:30 बजे रनिंग करते हैं और दिनभर मजदूरी के बाद स्विमिंग का अभ्यास भी जारी रखते हैं। मेडिकल की पढ़ाई बीच में छोड़कर उन्होंने दिल्ली आकर अपने सपनों की ओर कदम बढ़ाया। उनकी महीने की करीब 30,000 रुपये की कमाई का अधिकांश हिस्सा डाइट और ट्रेनिंग पर खर्च हो जाता है।
फिलहाल रोहित ओलंपिक क्वालीफाइंग टाइम से 6 मिनट पीछे हैं। उनका कहना है कि अगर उचित सहयोग और संसाधन मिलें, तो यह लक्ष्य वह एक साल नहीं बल्कि मात्र छह महीनों में हासिल कर सकते हैं।







