वाराणसी में कोटेदारों ने अपने संगठन की ओर से खाद्यान्न एवं चीनी के लाभांश में वृद्धि तथा मिनिमम इनकम गारन्टी लागू किए जाने की मांग को लेकर फूड अफसर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
कोटेदारों ने ज्ञापन में कहा कि वे शासन के निर्देशों के अनुसार ईमानदारी से राशन वितरण करते आ रहे हैं। कोरोना काल में भी कोटेदारों ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत निःशुल्क खाद्यान्न का वितरण बिना किसी भेदभाव और जोखिम की परवाह किए किया। यह सेवा पूरे देश में सराहनीय रही और उत्तर प्रदेश सरकार को भारत सरकार की ओर से प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया गया।
कोटेदारों ने बताया कि वे राशन वितरण के अलावा सरकार की कई योजनाओं—जैसे आयुष्मान कार्ड, किसान फार्मर रजिस्ट्री, एसआईआर वोटर लिस्ट संशोधन आदि—में भी लगातार सहयोग कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें वर्तमान में सिर्फ 90 रुपये प्रति क्विंटल ही लाभांश मिलता है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि अन्य राज्यों में कोटेदारों को इससे कहीं अधिक लाभांश या मिनिमम इनकम गारंटी दी जा रही है। उदाहरण के तौर पर—
- हरियाणा: ₹200 प्रति क्विंटल
- गोवा: ₹220 प्रति क्विंटल
- केरल: ₹200 प्रति क्विंटल
- दिल्ली: ₹200 प्रति क्विंटल
- गुजरात: ₹20,000 मिनिमम इनकम गारंटी
कोटेदारों का कहना है कि इतनी कम आय में वर्तमान महंगाई के दौर में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए सरकार से मांग की गई है कि उत्तर प्रदेश में भी अन्य राज्यों की तर्ज पर लाभांश बढ़ाया जाए और मिनिमम इनकम गारन्टी लागू की जाए।
कोटेदारों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे 28 जनवरी 2026 से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन एवं विधानसभा घेराव करने के लिए बाध्य होंगे। इसका दायित्व शासन–प्रशासन व उत्तर प्रदेश सरकार का होगा।










