वाराणसी । जनपद में भीषण गर्मी के बीच जल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है, जिससे विशेषकर गरीब, असहाय और कमजोर वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। जिन परिवारों के पास निजी बोरिंग या समरसेबिल की सुविधा नहीं है, वे पूरी तरह नगर निगम की जल आपूर्ति पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि दो-दो दिन तक पानी की सप्लाई बंद रहती है, तो घरों में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए दैनिक जीवन चलाना बेहद कठिन हो जाता है। शौच, स्नान और भोजन जैसी मूलभूत जरूरतें भी पूरी नहीं हो पातीं।
स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब महीने में 10 से 15 दिन तक पंप खराबी, बिजली फाल्ट और पाइपलाइन दिक्कतों का हवाला देकर जल आपूर्ति बाधित कर दी जाती है। वहीं, जो पानी उपलब्ध होता भी है, वह इतना गंदा और बदबूदार होता है कि उसका उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाता है। लोगों का आरोप है कि इस पानी में मल-मूत्र जैसी गंदगी तक मिली होती है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi के संसदीय क्षेत्र काशी में इस तरह की स्थिति स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। नगर निगम, जल निगम और जलकल विभाग के बीच समन्वय की कमी साफ दिखाई देती है, जहां अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर बचते नजर आते हैं।
स्थानीय जनता अब बेहतर जल व्यवस्था, नियमित सप्लाई और स्वच्छ पानी की मांग कर रही है, ताकि इस भीषण गर्मी में जीवन सामान्य रूप से चल सके।







