National Crime Records Bureau (NCRB) की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में आत्महत्या करने वालों में सबसे बड़ी संख्या दिहाड़ी मजदूरों की रही। आंकड़ों के अनुसार, आत्महत्या करने वाला हर तीसरा व्यक्ति दिहाड़ी मजदूर था।
रिपोर्ट में बेरोजगारी, आर्थिक तंगी और रोजमर्रा के मानसिक तनाव को इस गंभीर स्थिति की प्रमुख वजह बताया गया है। लगातार बढ़ती महंगाई, अस्थिर रोजगार और पारिवारिक जिम्मेदारियों का दबाव मजदूर वर्ग पर भारी पड़ रहा है।
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में यह संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है, जिसने श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट सामने आने के बाद मजदूरों के जीवन, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के लिए स्थायी आय, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।








