वाराणसी । के ऐतिहासिक एवं प्रतिष्ठित The Banaras Club Limited की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। कलेक्ट्रेट के राजस्व बार एसोसिएशन से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता जितेन्द्र कुमार तिवारी ने विशेष न्यायाधीश (SC/ST Act) की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर क्लब के वर्तमान एवं पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 379 के तहत मुकदमा दर्ज कर उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की गई है। मामले की अगली सुनवाई 23 मई 2026 को निर्धारित की गई है। इसकी जानकारी बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई।
प्रार्थी के अनुसार, वर्ष 1848 में स्थापित बनारस क्लब को कंपनी एक्ट 1882 के तहत ‘नो प्रॉफिट संस्था’ के रूप में पंजीकृत किया गया था। आरोप है कि क्लब ने ग्राम पहड़पुर एवं पुलिस कार्यालय के पास स्थित बहुमूल्य सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है। नगर मजिस्ट्रेट की जांच के बाद 27 जनवरी 2011 को बेदखली का आदेश भी पारित हुआ था, जिसके खिलाफ जिला जज न्यायालय में अपील लंबित है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि क्लब के पदाधिकारी प्रशासनिक रसूख का इस्तेमाल कर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। दस्तावेजों में हेरफेर, सरकारी अभिलेखों में कूटकरण, मूल दस्तावेज गायब करने तथा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) में गलत जानकारी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
सरकारी वकील द्वारा 5 फरवरी 2026 को अदालत में दाखिल आपत्ति में भी क्लब की ओर से न्यायालय पर दबाव बनाने और भ्रामक तथ्य प्रस्तुत करने की बात कही गई है। मामले में वर्तमान सचिव अतुल सेठ समेत कई पूर्व पदाधिकारी, पूर्व कमिश्नर और पूर्व जिलाधिकारी को भी पक्षकार बनाया गया है। अब पूरे शहर की निगाहें 23 मई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।







