बलिया। जनपद रसड़ा की कवयित्री शिल्पी पांडेय ने अपनी भावनात्मक कविता के माध्यम से देश के वीर शहीदों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को नमन किया है। उनकी रचना में ‘भरत’ नामक प्रतीकात्मक पात्र के जरिए नए भारत के निर्माण में बलिदान देने वाले देशभक्तों की गाथा को जीवंत किया गया है। कविता में देशभक्ति, त्याग और बलिदान की भावना को अत्यंत मार्मिक रूप से प्रस्तुत किया गया है।
कवयित्री ने यह दर्शाया है कि कैसे देश की स्वतंत्रता और सम्मान के लिए अनेक वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी और इतिहास के पन्नों में अमर हो गए। “गोली खाई, पर सिर नहीं झुकाया” जैसे भावों के माध्यम से शहीदों के अदम्य साहस और निडरता को उजागर किया गया है। रचना में मातृभूमि के प्रति गहरी संवेदना और प्रेम झलकता है।
कविता में माँ, बहन और पिता के दुःख का चित्रण करते हुए बलिदान की पीड़ा को भी उभारा गया है। अंत में कवयित्री ने “माँ भारती” की पुकार के माध्यम से शहीदों की अमर स्मृति और उनके लौट आने की प्रतीकात्मक इच्छा व्यक्त की है। यह रचना नई पीढ़ी को देशभक्ति और त्याग का संदेश देती है।
रिपोर्टिंग बलिया संजय सिंह।








