वाराणसी । राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय के प्राचार्य प्रो. डी.के. मौर्य ने बताया कि स्वर्णप्राशन आयुर्वेद की प्राचीन एवं प्रभावी परंपरा है, जो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, बुद्धि और स्मरण शक्ति के विकास में सहायक मानी जाती है। जन्म से 16 वर्ष तक के बच्चों को यह औषधि दी जाती है तथा प्रत्येक माह पुष्य नक्षत्र के दिन इसका सेवन सबसे उत्तम माना गया है।
आगामी स्वर्णप्राशन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए लॉर्ड बुद्धा चेरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो. मनोहर राम ने ₹11,000 का चेक प्रदान कर सहयोग दिया। महाविद्यालय प्रशासन ने उनके इस योगदान की सराहना करते हुए इसे जनकल्याण और बाल स्वास्थ्य के प्रति प्रेरणादायी पहल बताया। काशी के बच्चों के स्वास्थ्य संवर्धन के लिए किए गए इस सहयोग पर प्रो. मनोहर राम के प्रति आभार व्यक्त किया गया।









