वाराणसी। आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर 29 जुलाई 2026, बुधवार को सारनाथ में धर्मचक्र प्रवर्तन दिवस संदेश रैली का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के संकल्पना एवं संयोजक नागपुर के डॉ. विनोद अनाव्रत ने बताया कि लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व भगवान बुद्ध ने आषाढ़ पूर्णिमा के दिन सारनाथ में प्रथम उपदेश देकर धर्मचक्र प्रवर्तन किया था। इसी ऐतिहासिक घटना को बौद्ध धर्म का जन्मदिन माना जाता है, क्योंकि इसी दिन बौद्ध धर्म की औपचारिक स्थापना हुई थी।
उन्होंने कहा कि आषाढ़ पूर्णिमा को केवल वर्षावास की शुरुआत के रूप में मनाना ऐतिहासिक दृष्टि से उचित नहीं है। परंपरा के अनुसार वर्षावास आषाढ़ पूर्णिमा के अगले दिन से प्रारंभ होता है। इसलिए इस दिन का प्रमुख महत्व धर्मचक्र प्रवर्तन और बुद्ध के प्रथम उपदेश से जुड़ा है।
डॉ. अनाव्रत ने बताया कि वर्ष 1956 में भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवनकाल में नागपुर में भारतीय बौद्धजन समिति द्वारा पहली बार धर्मचक्र प्रवर्तन दिवस आषाढ़ पूर्णिमा पर मनाया गया था। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने और समाज में इसके महत्व का संदेश पहुंचाने के उद्देश्य से सारनाथ में संदेश रैली निकाली जाएगी। आयोजकों ने बौद्ध अनुयायियों एवं आमजन से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर बौद्ध धर्म के जन्मदिन को उत्सव के रूप में मनाने की अपील की।







