भारत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर अपनाई गई सख्त और निर्णायक नीति अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनती जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपराध और संगठित गिरोहों के खिलाफ चलाए गए कठोर अभियानों ने शासन की नई कार्यशैली को सामने रखा है। अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई, माफियाओं पर शिकंजा और अपराधियों में कानून का भय स्थापित करने जैसी नीतियों ने आम लोगों के बीच सुरक्षा की भावना को मजबूत किया है।
उत्तर प्रदेश में “गुंडों का उल्टा हिसाब” जैसी कार्यशैली को कानून के सख्त पालन और अपराध नियंत्रण के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि अब पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी भारत के इस मॉडल की चर्चा तेज हो गई है। वहां कानून-व्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या भारत जैसी कठोर नीति अपनाकर अपराध और अराजकता पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई और कानून के समान पालन से व्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव होता है। भारत का यह मॉडल अब सीमाओं के पार भी एक प्रभावशाली उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।









