सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि कोई बालिग महिला अपनी इच्छा और सहमति से वेश्यावृत्ति करती है, तो इसे अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने पुलिस और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिया कि ऐसी महिलाओं को अनावश्यक रूप से परेशान, गिरफ्तार या प्रताड़ित न किया जाए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य उन मामलों पर कार्रवाई करना है, जहां किसी महिला को जबरन देह व्यापार में धकेला गया हो, मानव तस्करी की गई हो या धोखे एवं दबाव के जरिए इस कार्य के लिए मजबूर किया गया हो। ऐसे मामलों में ही इमोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट (ITPA) के तहत कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि सभी नागरिकों की तरह यौनकर्मियों को भी सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार है तथा उनके मौलिक अधिकारों का संरक्षण किया जाना चाहिए।







