वाराणसी। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इस वर्ष चातुर्मास्य व्रत छत्तीसगढ़ के बेमेतरा स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में करेंगे, इसलिए गुरु पूर्णिमा पर काशी में उपस्थित नहीं रहेंगे। काशीवासियों के आग्रह पर उन्होंने गुरु पूर्णिमा से पूर्व अपने चरण पादुका पूजन की अनुमति दी। इसी क्रम में सोमवार शाम शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत चरण पादुका पूजन संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने गौमाता की रक्षा के लिए 81 दिवसीय गविष्ठी यात्रा पूर्ण करने पर शंकराचार्य का अभिनंदन भी किया।

अपने संदेश में शंकराचार्य ने गुरु पूर्णिमा पर सभी सनातनियों से गौरक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गौमाता 33 कोटि देवी-देवताओं की आश्रयस्थली हैं और उनके पूजन से सभी देवताओं के पूजन का पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में पहली रोटी गौमाता के लिए निकालना उनके सर्वोच्च महत्व का प्रतीक है।
मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि चातुर्मास के दौरान सपाद लक्षेश्वर धाम में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभाओं के प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित होगी, जिसमें गौरक्षा अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। शंकराचार्य 28 जुलाई को काशी से छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे।






